Success Story: गरीबी से जंग, IIT की डिग्री और 160 करोड़ का कारोबार! जानिए बिहार के इस युवा की सक्सेस स्टोरी

मां ने गहने बेचे, बेटा बना 160 करोड़ का बिजनेस खड़ा करने वाला उद्यमी… भागलपुर के एक साधारण परिवार से निकलकर आईआईटी तक का सफर और फिर करोड़ों का स्टार्टअप अरुणाभ सिन्हा की कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं, नई शुरुआत होती है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 28, 2026, 6:51:03 PM

Success Story: गरीबी से जंग, IIT की डिग्री और 160 करोड़ का कारोबार! जानिए बिहार के इस युवा की सक्सेस स्टोरी

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Success Story: “कोशिश कर, हल निकलेगा; आज नहीं तो कल निकलेगा। अर्जुन के तीर सा साध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा…” कवि आनंद परम की ये पंक्तियां बिहार के भागलपुर जिले के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले अरुणाभ सिन्हा के संघर्ष और सफलता पर सटीक बैठती हैं।

 

अरुणाभ का परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं था। जब उन्हें आईआईटी में दाखिला मिला, तब पढ़ाई का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में उनकी मां ने बिना सोचे-समझे अपने गहने बेच दिए, ताकि बेटे का सपना अधूरा न रह जाए। मां के इस त्याग ने अरुणाभ को और मेहनत करने की प्रेरणा दी।


अरुणाभ को आईआईटी बॉम्बे में एडमिशन मिला, जहां उन्होंने मेटलर्जी और मैटेरियल साइंस में पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने “फ्रेंग्लोबल” नाम से अपनी पहली कंपनी शुरू की। हालांकि, यह स्टार्टअप ज्यादा सफल नहीं हो पाया और उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा।


लेकिन अरुणाभ ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी असफलता से सीख ली और आगे बढ़ने का फैसला किया। साल 2015 में उन्होंने अपनी कंपनी बेच दी और ट्रीबो होटल्स में सीनियर पद पर काम करना शुरू किया। वहां उनकी सैलरी करीब 12 लाख रुपये प्रति माह बताई जाती है।


हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करते हुए अरुणाभ ने एक बड़ी समस्या पर ध्यान दिया। उन्होंने देखा कि होटलों में आने वाली करीब 60 प्रतिशत शिकायतें लॉन्ड्री से जुड़ी होती हैं। यहीं से उन्हें एक नया बिजनेस आइडिया मिला। उन्होंने महसूस किया कि अगर लॉन्ड्री सेवा को व्यवस्थित और बेहतर बनाया जाए, तो इसमें बड़ा अवसर है।


इसके बाद उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और पत्नी गुंजन सिन्हा के साथ मिलकर “UClean” नाम से लॉन्ड्री बिजनेस शुरू किया। शुरुआत में उनके माता-पिता इस फैसले से खुश नहीं थे, क्योंकि वे पहले ही एक स्टार्टअप की असफलता देख चुके थे। लेकिन अरुणाभ को अपने आइडिया पर पूरा भरोसा था।


UClean का बिजनेस मॉडल सरल है। कंपनी 24 से 48 घंटे के अंदर कपड़े धोकर और प्रेस करके ग्राहकों को वापस देती है। इसमें वॉश एंड आयरन, ड्राई क्लीन और खास देखभाल जैसी सेवाएं शामिल हैं। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनका बिजनेस तेजी से आगे बढ़ता गया।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज UClean का सालाना टर्नओवर करीब 160 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। कंपनी के लगभग 800 आउटलेट्स देश-विदेश में काम कर रहे हैं। अरुणाभ का सपना है कि आने वाले समय में इनकी संख्या 1000 तक पहुंच जाए।