1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 25, 2026, 3:14:22 PM
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UPSC Success Story: “कोशिश कर, हल निकलेगा; आज नहीं तो कल निकलेगा। अर्जुन के तीर सा साध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा…” कवि आनंद परम की ये पंक्तियां छत्तीसगढ़ के रहने वाले संजय डहरिया की संघर्ष और सफलता पर सटीक बैठती हैं। जो हर किसी को अंदर तक प्रेरित कर देती है। एक तरफ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से 6 साल लंबी लड़ाई, दूसरी तरफ चार बड़ी सर्जरी और लकवा जैसी गंभीर स्थिति—इन सबके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। आखिरकार 38 साल की उम्र में उन्होंने UPSC Civil Services Examination पास कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।
संजय डहरिया छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार साधारण है और उनके पिता खेती करते हैं। आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत स्थिति नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई को सबसे ऊपर रखा। संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की, जहां सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने सपनों को आकार देना शुरू किया।
आगे चलकर उनका चयन नवोदय विद्यालय में हुआ, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। यहां से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उन्होंने पहली बार एक IAS अधिकारी को देखा और उसी क्षण उनके मन में यह सपना जन्म लिया कि एक दिन उन्हें भी प्रशासनिक सेवा में जाना है। हालांकि, परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने सीधे तैयारी शुरू करने के बजाय पहले नौकरी करने का फैसला किया।
12वीं के बाद उन्होंने एक स्कूल में शिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। बाद में उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडिया पोस्ट जैसी सरकारी संस्थाओं में भी नौकरी की। नौकरी के साथ-साथ वे रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई के लिए निकालते थे। यह समय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया।
साल 2012 में उनकी जिंदगी ने अचानक एक कठिन मोड़ ले लिया, जब उन्हें कैंसर होने का पता चला। यह खबर किसी भी इंसान को तोड़ सकती है, लेकिन संजय ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। इलाज के दौरान उन्हें लकवा जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ा, जिससे उनकी हालत और गंभीर हो गई। 2013 से 2015 के बीच उनकी चार बड़ी सर्जरी हुईं। यह समय उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन था।
लंबे इलाज, दर्द और अनिश्चितता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कई सालों तक इलाज और नियमित जांच के बाद उन्होंने इस बीमारी को मात दे दी। इस दौरान उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका आत्मविश्वास और परिवार का साथ रहा। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी जिंदगी को पटरी पर लाना शुरू किया और फिर से अपने सपने की ओर कदम बढ़ाए।
साल 2019 में उन्होंने पहली बार UPSC की परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यह असफलता उनके लिए एक बड़ा झटका हो सकती थी, लेकिन उन्होंने इसे सीख के रूप में लिया। इसके बाद उन्होंने 2022 में रायपुर जाकर पूरी तरह से UPSC की तैयारी करने का निर्णय लिया और खुद को पूरी तरह पढ़ाई में झोंक दिया।
उनकी मेहनत और धैर्य का परिणाम तब सामने आया, जब UPSC 2025 के परिणाम में उन्होंने 946वीं रैंक हासिल की। 38 साल की उम्र में मिली यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन तमाम मुश्किलों पर जीत का प्रतीक है, जिनसे वे गुजरे।