Bihar Crime News: पुलिस पिटाई का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग, अवैध वसूली का विरोध करने पर सरपंच को पीटा था

मुजफ्फरपुर के पियर थाना क्षेत्र में सरपंच लालबाबू सहनी की कथित बेरहमी से पिटाई का मामला राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। पीड़ित ने पुलिस पर अवैध वसूली, मारपीट और फायरिंग के गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Thu, 12 Feb 2026 02:08:03 PM IST

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Bihar Crime News: मुजफ्फरपुर जिले के पियर थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़गांव निवासी सरपंच लालबाबू सहनी की कथित बेरहमी से पिटाई का मामला अब राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। पीड़ित सरपंच ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से दोनों आयोगों में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पियर थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।


याचिका के अनुसार, 6 फरवरी को पियर थाना के कुछ पुलिसकर्मी गांव के चौक पर कथित रूप से अवैध वसूली कर रहे थे। सूचना मिलने पर जब सरपंच लालबाबू सहनी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी लेने की कोशिश की, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें नजरबंद कर दिया। आरोप है कि इसके बाद थाना के कई पुलिसकर्मियों और पदाधिकारियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा।


पीड़ित का कहना है कि पियर थाना के पुलिस पदाधिकारी रजनीकांत ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनके हाथ-पैर टूट गए। उन्हें बचाने पहुंची उनकी भाभी के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई और उनका हाथ तोड़ दिया गया। याचिका में पुलिसकर्मी अखलेश कुमार, कमलेश्वर नाथ मिश्रा, धर्मेंद्र त्यागी, कुंदन कुमार, प्रिंस कुमार समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर गंभीर मारपीट, महिलाओं और बच्चों के साथ बर्बर व्यवहार तथा पीड़ित को बेहोश कर देने का आरोप लगाया गया है।


घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल सरपंच को एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज हुआ। पीड़ित का यह भी आरोप है कि पुलिस ने आम लोगों को डराने के उद्देश्य से तीन से चार राउंड फायरिंग की। बताया गया है कि घटना के बाद पियर थाना पुलिस ने सरपंच सहित कई ग्रामीणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि थाना क्षेत्र में नियमित रूप से अवैध वसूली की जाती है और निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर उगाही की जाती है।


मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह मामला मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।