Bihar News: निगरानी की गिरफ्त में आया 1 करोड़ के गबन का आरोपी मुखिया, 16 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

Bihar News: सीतामढ़ी में 1 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी मुखिया अवधेश साह को 16 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। निगरानी विभाग मामले की गहन जांच में जुटा है।

1st Bihar Published by: SAURABH KUMAR Updated Mar 10, 2026, 4:38:25 PM

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गिरफ्त में घूसखोर - फ़ोटो Reporter

Bihar News: सीतामढ़ी में निगरानी विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डुमरा कोर्ट परिसर के बाहर रुन्नीसैदपुर प्रखंड के कौड़ियां लालपुर पंचायत के मुखिया अवधेश साह को 16 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब मुखिया पर पंचायत की विभिन्न विकास योजनाओं में लगभग 1 करोड़ रुपये के गबन का गंभीर आरोप है।


जानकारी के अनुसार, मामला रुन्नीसैदपुर थाना कांड संख्या 236/19 से जुड़ा है। आरोप है कि सड़क, नाला, सामुदायिक भवन और अन्य विकास योजनाओं के लिए जारी सरकारी राशि का बड़ा हिस्सा केवल कागजों तक सीमित रहा, जबकि कई कार्य अधूरे या अपूर्ण रह गए। जांच के दौरान पंचायत स्तर पर हुए भुगतान, बैंक खातों से निकासी, वाउचर और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई, जिसमें कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए।


निगरानी विभाग के सूत्रों ने बताया कि अवधेश साह लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था और कथित तौर पर अदालत और दलालों के माध्यम से मामले को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा था। मंगलवार को निगरानी टीम ने पूरी गोपनीयता के साथ कार्रवाई करते हुए उसे रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया।


स्थानीय लोगों ने बताया कि पंचायत में कई योजनाओं के नाम पर बड़ी राशि निकाली गई, लेकिन जमीन पर उसका अपेक्षित परिणाम नहीं दिखा। कई सड़कों और नालों के निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए गए, जबकि कागजों में पूरा दिखाकर भुगतान किया गया।


गिरफ्तारी के बाद आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि गबन की राशि और अधिक होने के प्रमाण मिलते हैं, तो मामले में और कड़ी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।


इस कार्रवाई के बाद जिले में पंचायत स्तर पर चल रही योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराया जाए। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।