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दो साल से कम उम्र के बच्चों को कतई नहीं दें ये दवायें: हो सकता है भारी नुकसान, भारत सरकार ने जारी किया आदेश

भारत सरकार ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवा न देने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ऐसी दवाएं बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं और ज्यादातर मामलों में बिना दवा के ही खांसी ठीक हो जाती है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Oct 03, 2025, 8:46:24 PM

health ministry advisory cough syrup

प्रतिकात्मक - फ़ोटो AI

DELHI: भारत की सरकार ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को दवा देने के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया है. केंद्र सरकार ने कम उम्र के बच्चों को कुछ ऐसी दवायें नहीं देने का आदेश जारी किया है, जिनका उपयोग अमूमन हर घऱ में होता रहा है. अब सरकार कह रही है कि इससे बड़ा नुकसान हो सकता है.   


बच्चों को न दें कफ सिरप

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों की दवा को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया है. इस आदेश में कहा गया है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी सूरत में कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिये. 2 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को भी कफ सिरप देने में काफी सावधानी बरतना चाहिये. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर नये दिशा-निर्देश लागू करने को कहा है. 


केंद्र सरकार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बच्चों को अगर बहुत ज्यादा खांसी हो तो भी वह बिना किसी दवा के ठीक हो जाती है. बच्चों की खांसी को रोकने के लिए कफ सिरप या दूसरी दवा का प्रयोग जरूरी नहीं है. 


बच्चों को सर्दी की भी दवा नहीं दें

केंद्र सरकार ने कहा है कि डॉक्टरों की ओर से 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खांसी और सर्दी की दवा नहीं दी जानी चाहिये. सिर्फ 2 साल से कम उम्र वाले बच्चों को ही नहीं बल्कि 5 साल से कम आयु के बच्चों को ऐसी दवा नहीं दी जानिये. उससे ज्यादा के उम्र के बच्चों को बेहद सावधानी के साथ और सीमित मात्रा में खांसी-सर्दी की दवा देनी चाहिये. उन्हें भी सीमित समय के लिए कम मात्रा में दवा देना चाहिये और बहुत ज्यादा दवाईयां नहीं दी जानी चाहिये. 


आम लोग भी सावधान रहें

केंद्र सरकार ने कहा है कि लोगों को जागरूक किया जाना चाहिये कि डॉक्टर उनके बच्चों को कौन सी दवा दे रहे हैं. केंद्र सरकार ने कहा है कि खांसी औऱ सर्दी को बिना दवा के भी ठीक किया जा सकता है. बच्चों को पर्याप्त पानी देकर, आराम देकर और दूसरे तरीकों से ठीक करने की कोशिश की जानी चाहिये. इसके बाद ही किसी दवा का प्रयोग किया जाना चाहिये.


सही दवा का इस्तमाल करें

केंद्र सरकार ने सभी डॉक्टरों और अस्पतालों से कहा है कि वे केवल गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के तहत निर्मित और औषधीय गुणवत्ता वाले अवयवों से बनी दवाओं का ही उपयोग करें. केंद्र सरकार ने कहा है कि सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों को दवा लिखने से पहले उसकी गुणवत्ता को पऱख लेना चाहिये. केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से अपने दिशा-निर्देश को लागू करने को कहा है. इसके लिए सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजा गया है.