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javed akthar: ऑपरेशन सिंदूर पर बॉलीवुड की चुप्पी, कुछ लोग अभी भी पैसा ...जावेद अख्तर ने क्या कहा?

javed akthar: दिग्गज गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बॉलीवुड हस्तियों की चुप्पी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सरकार की तारीफ की और साथ ही बॉलीवुड के कुछ नामी कलाकारों की चुप्पी पर सवाल उठाए।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 31, 2025, 2:14:38 PM

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बॉलीवुड हस्तियों की चुप्पी पर प्रतिक्रिया - फ़ोटो Google

javed akthar: दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर हमेशा से अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। वो ना केवल कला और संस्कृति पर खुलकर बोलते हैं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखने से पीछे नहीं हटते। हाल ही में उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' और बॉलीवुड की चुप्पी को लेकर बड़ा बयान दिया है।


सरकार की कार्रवाई की तारीफ, पर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार द्वारा किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' की जावेद अख्तर ने जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जिस तरह जवाब दिया गया, वह सराहनीय है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बॉलीवुड की कई नामी हस्तियां इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जो सोचने वाली बात है। उन्होंने कहा कि मैनें बोला, बाकी कौन नहीं बोल रहा—मुझे नहीं पता"'द लल्लनटॉप' को दिए गए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि कई बड़े सितारे इस ऑपरेशन पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे, तो जावेद ने साफ कहा कि मैंने तो बात की, मैं चुप नहीं रहा। लोग मेरी बात को कभी पसंद करते हैं, कभी नहीं। लेकिन मैं वही कहता हूं जो मुझे सच लगता है। अब कौन नहीं बोलता, मुझे क्या पता? कुछ लोग राजनीतिक नहीं होते।


"हर किसी के बोलने की ज़रूरत नहीं होती" उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपने काम में इतने व्यस्त होते हैं कि उन्हें देश-दुनिया की खबरें तक नहीं होतीं। जावेद अख्तर ने याद करते हुए बताया कि जब मैं नया था और मेरी फिल्में हिट हो रही थीं, तो मुझे भी राजनीति की ज्यादा जानकारी नहीं थी। शायद अखबार भी न पढ़ता हो। ऐसा होता है। अगर कोई नहीं बोल रहा, तो कोई बात नहीं। हर किसी को बोलना ज़रूरी नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग बस शोहरत और पैसा कमाने में लगे हैं। उन्हें करने दीजिए। सबकी प्राथमिकताएं अलग होती हैं।"जावेद अख्तर का यह बयान साफ संकेत देता है कि देशहित में उठने वाली आवाज जरूरी है, लेकिन सभी से उम्मीद रखना भी गलत है। कुछ लोग बोलते हैं, कुछ नहीं — मगर जो बोलते हैं, उन्हें खुलकर बोलना चाहिए।