1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 03, 2024, 5:41:24 PM
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AURANGABAD: औरंगाबाद जिले की ऐतिहासिक सूर्यनगरी देव में अन्नपूर्णा भोजनालय चलाने वाले शक्ति मिश्रा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन औरंगाबाद से दाखिल किया था। लेकिन नामांकन के कागजात में त्रुटि के कारण उनका नामांकन रद्द कर दिया गया है। नामांकन रद्द होने से शक्ति मिश्रा काफी नाराज बताए जाते हैं। उनका कहना है कि औरंगाबाद की जनता की सेवा करने के लिए और यहां की समस्याओं को दूर करने के लिए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। लेकिन निर्वाचन आयोग ने उनका नामांकन रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह लोगों की सेवा करते रहेंगे। अभी 20 रुपये में भरपेट खाना खिलाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
उनका कहना है कि यहां लोगों की समस्याएं ज्यादा हैं। उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए हम चुनाव मैदान में उतरे थे। सोचा था कि जनता की सेवा करेंगे लेकिन नामांकन रद्द हो गया। वैसे कोई बात नहीं, हम लोगों की सेवा अन्नपूर्णा भोजनालय के जरिये करते रहेंगे और मात्र 20 रुपये में लोगों को भर पेट खाना खिलाते रहेंगे।
बता दें कि बनारस के रहने वाले बिजनेसमैन शक्ति मिश्रा औरंगाबाद के देव गांव में अन्नपूर्णा भोजनालय चलाते हैं। देव आने वाले लोगों को महज 20 रुपये में वह भर पेट खाना खिलाते हैं। औरंगाबाद की जनता की सेवा करने के लिए उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था। लेकिन उनका नामांकन रद्द हो गया। जिससे उन्हें निराशा हाथ लगी है।
शक्ति मिश्रा फाउंडेशन के तहत अन्नपूर्णा भोजनालय चलाने वाले शक्ति मिश्रा का कहना है कि हमारे यहां गरीबी बहुत बड़ा मुद्दा है। लोगों को भूख से बचाने के लिए हमने भोजनालय शुरू किया है। जहां 20 रुपये में भरपेट भोजन कराते हैं।
उनका कहना है कि औरंगाबाद के देव में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जिनकी सेवा करने का हमें मौका मिलता है। शक्ति मिश्रा ने बताया कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने औरंगाबाद से नामांकन भरा था। यहां कि जनता ने घर से उठाकर पर्चा भरवाया था।
उन्होंने बताया कि हमारा जिला समस्याओं से जुझ रहा है। यहां न तो हॉस्पिटल है और न ही कोई इंजीनियरिंग कॉलेज। यहां के किसान सिंचाई की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि हमारा नामांकन रद्द हुआ है लेकिन हम जनसेवा करते रहेंगे। जब तक शरीर में सांस है तबतक अन्नपूर्णा भोजनालय हम चलाते रहेंगे और बीस रुपये में भरपेट लोगों को खाना खिलाते रहेंगे।