1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jan 17, 2024, 8:56:00 AM
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PATNA : बिहार की पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्चे और बच्चियों के गायब होने पर उन्हें जल्द से जल्द बरामद करने के लिए राज्य के डीजीपी को एसओपी जारी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ये भी कहा कि- राज्य की पुलिस जनता के लिए काम नहीं करती। जब अपने ऊपर गुजरता हैं, तब उन्हें दर्द महसूस होता है।
दरअसल,पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने अपहृत बच्चे के पिता विनय कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2018 में बच्चा गायब हुआ और पुलिस अब तक उसे खोज नहीं सकी। आखिर पुलिस अबतक इस मामले में कोई एक्शन क्यों नहीं लिया है।
कोर्ट ने पुलिस के उदासीन रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी उतर जाने के बाद स्वयं उन पर इस तरह की घटना घट जाती होगी तब उन्हें जरूर याद आता होगा कि एक समय पीड़ित परिवार कैसे उनके सामने गिड़गिड़ाते थे। 60 वर्ष की उम्र में नौकरी (रिटायरमेंट) के बाद वर्दी साथ नहीं रहेंगी।
कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2018 में बच्चा गायब हुआ और पुलिस अब तक उसे खोज नहीं सकी। जब कोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में सुनवाई शुरू की तो पुलिस ने आनन-फानन में गत 13 फरवरी को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। यह सिर्फ इसलिए किया गया कि जांच अधिकारी की कमियों को छिपाया जा सके।
इसके आगे कोर्ट ने कहा कि गत दिनों डी.एस.पी. ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वह मामले को गंभीरता और ईमानदारी से लेंगे. पीड़ित लड़के का पता लगाने और अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ने का प्रयास करेंगे।लेकिन, आज तक बच्चा के बारे में कोई सुराग नहीं लगा सकें। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को पार्टी बनाने का आदेश दिया। ताकि सीबीआई पुलिस अधिकारियों के कार्यकलापों की जांच कर सकें।
आपको बताते चलें कि, यह मामला पटेल नगर स्थित देव पब्लिक स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला घर से स्कूल गये 2018 में गायब हो गया। काफी खोजबीन किये जाने पर जब कुछ पता नहीं चला, तो शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी कांड संख्या 636/18 दर्ज कराई। कोर्ट का मानना था कि समय बीत जाने पर साक्ष्य मिलना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में गायब बच्चों की बरामदगी आसान नहीं होती।