1st Bihar Published by: Updated May 04, 2022, 7:33:20 AM
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PATNA : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अचानक से सुर्खियों में हैं। बिहार आने के बाद प्रशांत किशोर ने जब जन सुराज लाने की बात कही तो उसके बाद यह माना गया है कि पीके कोई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने वाले हैं। पीके के इस गांव को लेकर बिहार की सियासत में भूचाल आ गया। तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आने लगी लेकिन प्रशांत किशोर के साथ 2015 के विधानसभा चुनाव में काम कर चुके नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव को इस बात का अंदाजा अच्छे से है कि दरअसल पीके किस तरह की प्लानिंग के साथ अपनी पॉलिटिक्स आगे बढ़ाते हैं। यही वजह है कि पीके के खिलाफ नीतीश और तेजस्वी ने एक ही तरह की रणनीति अपनाई है।
दरअसल प्रशांत किशोर की पॉलिटिकल एंट्री को लेकर जब तमाम नेता प्रतिक्रिया दे रहे थे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सवाल को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इन सब बातों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। नीतीश में पीके के ऊपर बहुत कुछ बोलने से परहेज किया। हालांकि नीतीश कुमार से उनके व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। खुद नीतीश भी इस बात को खुले तौर पर कबूल करते हैं कि प्रशांत किशोर से उनकी नजदीकियां हैं। प्रशांत किशोर दिल्ली में नीतीश कुमार से मुलाकात भी करते रहे हैं लेकिन बिहार में जब पीके एक्टिव हुए तो नीतीश ने इस पर कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं समझा।
उधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर को लेकर दो टूक जवाब दे दिया कि वह पीके का न्यूज़ नहीं देखते। तेजस्वी ने कहा कि यह सब खबरें उनके पास नहीं होती। तेजस्वी का यह जवाब बताता है कि दरअसल वह पीके की प्लानिंग को इग्नोर करना चाहते हैं। अगर तेजस्वी प्रशांत किशोर की तैयारी को ज्यादा तवज्जो नहीं देते तो पीके के लिए इस मोर्चे पर आगे बढ़ना थोड़ा मुश्किल होगा। तेजस्वी समझ रहे हैं कि अगर प्रशांत किशोर के ऊपर प्रतिक्रिया दी गई तो बैठे-बिठाए उन्हें बिहार की राजनीति में चर्चा मिल जाएगी। यही वजह है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी फिलहाल प्रशांत किशोर को लेकर एक ही तरह की रणनीति अपना रहे। चाचा भतीजे दोनों की तरफ से प्रशांत किशोर पर इग्नोर पॉलिटिक्स जारी है।