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भारत रत्न से सम्मानित हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत मिला यह सम्मान

1st Bihar Published by: 7 Updated Aug 08, 2019, 9:44:21 PM

भारत रत्न से सम्मानित हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को मरणोपरांत मिला यह सम्मान

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DESK : देश के 3 अनमोल रत्नों को इस साल देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया है .पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जनसंघ के नेता नाना जी देशमुख और प्रख्‍यात गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न से नवाजा गया है. भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को मरणोपरांत यह पुरस्कार मिला है. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे. भारत रत्न हिंदुस्तान का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, जो असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. केंद्र की मोदी सरकार ने 70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2019 को भारतीय जनसंघ के विचारक और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक नानाजी देशमुख, प्रसिद्ध असमिया कवि और संगीतकार भूपेन हजारिका और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के लिए भारत रत्न की घोषणा की थी. भारत रत्न पाने वाले पांचवें राष्ट्रपति हैं प्रणब मुखर्जी मुखर्जी यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पांचवें राष्ट्रपति हैं. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. जाकिर हुसैन और वीवी गिरि को मिल यह सम्मान मिल चुका है. 2017 में राष्ट्रपति पद से निवृत्त हुए प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न मिला है. राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध थे. उन्होंने ढाई साल नरेंद्र मोदी सरकार के अंतर्गत काम किया था. भूपेन हजारिका ने असमिया लोकगीतों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया कवि, सिंगर, गीतकार और फिल्म निर्माता हजारिका का 85 वर्ष की आयु में 2011 में निधन हो गया था. उन्होंने असमिया लोक गीत और संस्कृति को हिंदी सिनेमा में लाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी. आरएसएस प्रचारक थे देशमुख इसके बाद भारत रत्न के लिए तीसरी पसंद नानाजी देशमुख एक आरआरएस प्रचारक थे, जो 60 के दशक में उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनकर उभरे थे और 1980 के दशक में भाजपा के शिल्पकारों में से एक थे.देशमुख ने दीन दयाल उपाध्याय द्वारा स्थापित एकात्म मानववाद के दर्शन को फैलाने के लिए 1972 में दीनदयाल अनुसंधान संस्थान (डीडीआरआई) की स्थापना की थी. सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए चित्रकूट परियोजना शुरू की. 27 फरवरी, 2010 को नानाजी देशमुख का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया.