Bihar Politics: ‘50-100 ग्राम पीना गुनाह नहीं, पत्नी के लिए शराब ले जा रहे लोगों को पकड़ना गलत’, जीतन राम मांझी ने फिर से शराबबंदी पर उठाए सवाल

Bihar Politics: बिहार में शराबबंदी के क्रियान्वयन पर हम पार्टी के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने फिर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छोटे उपभोक्ताओं और मजदूर वर्ग को पकड़ा जा रहा है, जबकि बड़े शराब माफिया और तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Dec 09, 2025, 12:08:56 PM

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Bihar Politics: बिहार की सरकार में शामिल हम के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि माफिया अवैध तरीके से शराब की बड़ी बड़ी खेप बिहार भेज रहे हैं लेकिन इन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है और जो 50-100 ग्राम पी लेता है या पत्नी के लिए थोड़ी सी शराब लेकर जा रहा होता है उसे पकड़ा जा रहा है, जो सरासर गलत है।


दरअसल, बिहार में शराबबंदी की समीक्षा के सवाल पर केंद्रीय मंत्री और गया से हम सांसद जीतन राम मांझी ने कहा है कि शराबबंदी कानून बहुत ही अच्छा कानून है। शराबबंदी तो होनी ही चाहिए इसमें कोई शक नहीं है। नीतीश कुमार धन्यवाद के पात्र हैं जो उन्होंने शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कभी कभी कुछ ऐसी बाते आती हैं जिसके बारे में कहने के लिए हम बाध्य हो जाते हैं।


मांझी ने कहा कि तीसरी बात नीतीश कुमार ने जो शराबबंदी की समीक्षा की थी वह मेरे ही कहने पर की गई थी। कंटेनर से लाखों रूपए का शराब जो माफिया बिहार पहुंचा रहा है उसको पकड़ना जरूरी है। लेकिन जो मजदूर वर्ग का आता है और काम करके आता है अगर कहीं वह 50-100 ग्राम पी लेता है, उसको जेल भेज दिया जाता है यह ठीक नहीं है।


उन्होंने कहा कि जो शराब पीकर जा रहा हो उसके पकड़ने की जरूरत नहीं है। या कोई अपनी पत्नी के लिए दवा के रूप में ले जा रहा हो तो उसको नहीं पकड़ना है। वर्तमान प्रशासन को पता नहीं सरकार से चिढ़ है या कोई बात है कि वह ऐसे ही लोगों को पकड़ता है। गरीबों और मजदूर वर्ग को लोगों के पकड़े जाने का ही कारण है कि आज 6 लाख मुकदमा पेंडिंग पड़ा है।


उन्होंने बताया कि 6 लाख मुकदमों में से चार लाख मुकदमें ऐसे हैं जिनमें वे लोग पकड़े गए हैं जो शराब के आदी नहीं हैं। ये वैसे लोग हैं जो शराब की तस्करी नहीं करते हैं बल्कि थकावट दूर करने के लिए पी लेते हैं। बिहार में नदी और पहाड़ के किनारे हजारों लीटर शराब माफिया बना रहे हैं और बेचे जाते हैं। ये तस्कर इतने शातिर हो गए हैं कि अब चुनाव भी लड़ रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।


मांझी ने आगे कहा कि पदाधिकारियों की मिलीभगत के कारण बड़े माफिया और तस्कर आराम से घूम रहे हैं और उन्हे नहीं पकड़ा जा रहा है। इसमें थाने के लोग, एक्साइज विभाग के अधिकारी और पुलिस के अधिकारी शामिल हैं। झारखंड की सीमा पर चतरा से ट्रक में शराब लोड होती है और उसे भेज दिया जाता है। इस पर एक्शन होना चाहिए, सीएम नीतीश कुमार से एक्शन से तो मना नहीं किया है।


जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी के क्रियान्वयन में कहीं न कहीं गड़बड़ी हो रही है। इसपर सरकार को ध्यान देना चाहिए और पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं। मांझी ने कहा कि हमारे माता-पिता शराब बनाते थे और बेचते थे। जब हम पढ़ने लिखने लगे तो उनको मना किया तो मान गए। महुआ शराब बनाने की जो प्रक्रिया है उसमें आठ दिन का समय लगता है। उसमें ऐसे अने प्रकार के तत्व मिलाए जाते हैं जिससे फायदा ही होता है। लेकिन आज शराबबंदी के कारण जो चोरी छिपे शराब बनाई जा रही है वह दो घंटे में तैयार हो जाती है, जो शरीर के लिए हानिकारक है।


उन्होंने कहा कि जो बड़े अधिकारी है वह पचास हजार एक लाख रुपए बोतल की शराब ले जाते हैं और रात में 10 बजे के बाद पीते हैं लेकिन ये लोग नहीं पकड़े जा रहे हैं बल्कि गरीब लोगों को पकड़ा जा रहा है। शराब के माफिया आज चुनाव लड़ रहे हैं। 10-10 करोड़ में टिकट खरीदकर एमएलए का चुनाव लड़ रहे हैं और जीत भी हासिल करते हैं। इसपर कार्रवाई होनी चाहिए जो नहीं हो रही है।