1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 09, 2026, 10:25:20 AM
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NEET Student Case : पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा मामले में जांच एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब इस मामले में साक्ष्यों के साथ हुई कथित लापरवाही की गहराई से पड़ताल कर रही है। जांच का फोकस खास तौर पर छात्रा के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने में हुई देरी पर है। इसी सिलसिले में सीबीआई एक बार फिर निलंबित थानेदार रोशनी कुमारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अनु कुमारी से कड़ी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, पहले दौर की पूछताछ में कई ऐसे सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका था। ऐसे में अब सीबीआई पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन को दोबारा खंगाल रही है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि छात्रा का मोबाइल कब जब्त किया गया, कितने समय तक वह किस अधिकारी की कस्टडी में रहा और आखिरकार उसे फॉरेंसिक जांच के लिए कब भेजा गया।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मोबाइल को तकनीकी जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। यह देरी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी या फिर किसी स्तर पर जानबूझकर की गई, इस सवाल ने जांच एजेंसी को गंभीर रूप से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
सीबीआई अब मोबाइल की पूरी कस्टडी चेन को खंगाल रही है। इसके तहत केस डायरी में दर्ज विवरण, जब्ती सूची, संबंधित अधिकारियों के बयान और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जांच की शुरुआती अवस्था में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए थे और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
सूत्रों का कहना है कि छात्रा के मोबाइल फोन से मिलने वाला डेटा इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में बेहद अहम साबित हो सकता है। मोबाइल में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, चैट और अन्य डिजिटल जानकारी से यह पता चल सकता है कि घटना से पहले और बाद में क्या-क्या हुआ था। यही वजह है कि मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में हुई देरी को जांच एजेंसी बेहद गंभीरता से ले रही है।
सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या मोबाइल को जांच के लिए भेजने में हुई देरी महज प्रशासनिक लापरवाही थी या फिर इसके पीछे किसी तरह का दबाव या जानबूझकर की गई कार्रवाई शामिल थी। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी स्तर पर जानबूझकर देरी की गई, तो यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में जानबूझकर लापरवाही या देरी साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर ‘साक्ष्य मिटाने’ या जांच को प्रभावित करने से जुड़ी गंभीर धाराएं भी लग सकती हैं। ऐसे में यह मामला पुलिस महकमे के लिए भी काफी संवेदनशील बन गया है।
फिलहाल सीबीआई की टीम दस्तावेजों के मिलान, केस डायरी की समीक्षा और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में रोशनी कुमारी और अनु कुमारी से दोबारा पूछताछ के बाद इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या साक्ष्यों से छेड़छाड़ सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।