1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 09, 2026, 7:34:42 AM
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Bihar Police : बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस लाइन डीएसपी और कुढ़नी थानेदार समेत 12 पुलिस कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह वारंट उन पुलिस कर्मियों के लिए जारी किया गया है, जो मादक पदार्थ और हथियार से जुड़े मामलों में गवाही देने न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने इन अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीर मामला माना है और 9 मार्च को सभी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
विशेष एनडीपीएस कोर्ट-दो के न्यायाधीश नरेंद्र पाल सिंह ने यह कार्रवाई दो मामलों में अनुपस्थित रहने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ की है। पहले मामले में कुढ़नी थाना क्षेत्र के गरहुआ चौक से जुड़ा मामला है। चार साल पहले पुलिस ने रौशन कुमार नामक युवक को लोडेड कट्टा और 1.920 मिलीग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। मामले में चार्जशीट तो दाखिल की गई, लेकिन गवाही की प्रक्रिया शुरू होने पर कोई भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं हुआ।
इस मामले में तत्कालीन कुढ़नी थानाध्यक्ष अरविंद पासवान, तत्कालीन डीएसपी रक्षित विपिन नारायण शर्मा, आईओ विवेकानंद सिंह, एएसआई प्रकाश कुमार, गृहरक्षक कुमोद कुमार और दिनेश चौधरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। न्यायालय ने उनकी अनुपस्थिति को गंभीर मानते हुए गिरफ्तारी का आदेश दिया है।
दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र के खबरा भेल कालोनी से संबंधित है। अगस्त 2020 में पुलिस ने एटीएम फ्रॉड करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था। छापेमारी के दौरान छह बदमाशों के पास से एक किलो चरस, एटीएम क्लोनिंग मशीन और नकदी बरामद की गई थी। हालांकि, इस केस में भी पांच साल बीत जाने के बावजूद पुलिसकर्मी गवाही देने न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।
कोर्ट ने इस मामले में सूचक रघुवीर सिंह, आईओ राजेश यादव, सिपाही छोटेलाल सिंह, संजीव कुमार, गृहरक्षक अरविंद और धनिक कुमार राणा के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गवाही में बाधा डालने वाले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने दो मामलों में जारी किए गए वारंट की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि कानून की उपेक्षा किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति को अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाला कृत्य माना है। इन दोनों मामलों में एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है, और अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसकर्मियों की गवाही न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। गवाहों की अनुपस्थिति से मामले में देरी होती है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए न्यायालय ने इस बार स्पष्ट रूप से गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर यह संदेश दिया है कि कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है।
इस कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि 9 मार्च को सभी पुलिसकर्मी न्यायालय में हाजिर होते हैं या फिर कोर्ट और कड़ा रुख अपनाएगी। इस मामले ने बिहार पुलिस की छवि और न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में गवाहों की अनुपस्थिति को गंभीर अपराध माना जाएगा और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
इस प्रकार, बिहार में कानून व्यवस्था के प्रति न्यायालय की सख्ती एक बार फिर स्पष्ट हुई है। 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी होने से यह संदेश गया है कि न्यायालय में गवाही देना सभी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह पुलिसकर्मी ही क्यों न हों। न्यायालय की अगली सुनवाई पर ही यह साफ हो पाएगा कि पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं या न्यायालय की कार्रवाई का सामना करेंगे।यह मामला राज्य में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करता है, जिससे कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।