1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 06, 2025, 9:09:10 PM
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Bihar Politics: बिहार के सियासी पासवान फैमली में छिड़ा घमासान लगातार गहरा रहा है. करीब एक सप्ताह पहले स्व. रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी के आरोपों से छिड़ा घमासान हर रोज तेज होता जा रहा है. शनिवार को चिराग पासवान ने अपने पैतृक शहरबन्नी जाकर अपनी बड़ी मां से मुलाकात की थी. चिराग ने उसके बाद अपने चाचा पशुपति पारस पर हमला बोला था. आज पशुपति पारस ने तीखे सवाल पूछे हैं.
मां का इलाज क्यों नहीं कराया
पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने आज अररिया से मीडिया से बात करते हुए चिराग पासवान के आरोपों का जवाब दिया. पारस ने कहा कि चिराग पासवान ओछी राजनीति कर रहे हैं. वे शहरबन्नी गांव जाकर फोटो शूट करा रहे थे. राजकुमारी देवी से मिलने का दिखावा कर रहे थे.
पशुपति कुमार पारस ने कहा कि मीडिया को चिराग पासवान से पूछना चाहिए कि वे जब बड़ी मां राजकुमारी देवी से भेंट करने आए तो उनको इलाज के लिए क्यों नहीं पटना या दिल्ली ले गए. क्या चिराग पासवान अपनी मां का सही से इलाज नहीं करा सकते. क्या चिराग पासवान ने अपनी बड़ी मां को कभी पटना या दिल्ली की कोठी को एक बार भी दिखाया है.
इलेक्शन आते ही चिराग को पिता याद आते हैं
पशुपति कुमार पारस ने कहा कि इलेक्शन नजदीक आते ही चिराग पासवान को अपने स्वर्गीय पिता और बड़ी मां की याद आती है. बाकी समय वे जो करते हैं वह जगजाहिर है. मीडिया के सवालों के जवाब में पशुपति पारस ने कहा कि वे तीन भाई थे. शहरबन्नी में उनकी पैतृक संपत्ति है, जिसमें तीनों भाई का अधिकार है.
पारस ने कहा कि जब हमारे पिता की मृत्यु हो गयी तो उसके बाद मैंने 6 कमरों वाले पैतृक घर का पुनर्निमाण कराया. इस घर में दो-दो कमरा तीनों भाई के हिस्से में है. चिराग अगर चाहते हैं तो मैं बंटवारे के लिए तैयार हूं. मैंने अब तक शहरबन्नी की सारी जमीन अपनी बड़ी भाभी के लिए छोड़ रखी थी. लेकिन चिराग से पूछा जाना चाहिये कि उन्होंने अपनी बड़ी मां के लिए क्या किया. चिराग ने अपने पिता के सपनों पर पानी फेर दिया है.
चिराग ने बोला था हमला
बता दें कि एक सप्ताह से पासवान परिवार में घमासान छिड़ा है. इस बीच शनिवार को चिराग पासवान अपने पैतृक गांव शहरबन्नी पहुंचे थे. उन्होंने स्व. रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी से मुलाकात की थी. उसके बाद अपने चाचा पशुपति कुमार पारस पर हमला बोला था.
चिराग ने कहा था कि मेरी बड़ी मां का दुख, मेरा दुख है. मैं हर परिस्थिति में अपनी बड़ी मां के साथ खड़ा रहूंगा. उन्होंाने कहा कि पशुपति कुमार पारस घर के बड़े हैं. उन्हेने ही समय-समय पर फैसले लिए. मुझे परिवार से निकालने का फैसला उनका था, मेरी ही पार्टी से मुझे बाहर निकालने का फैसला उनका था, मेरे पिता जी के बनाए पार्टी का नामोनिशान मिटा देने का फैसला उनका था. परिवार में यदि बंटवारा वो चाहते हैं तो यह फैसला भी उनका ही होगा. यदि वो इस फैसले की राह पर चल चुके हैं तो जानकारी दे सकते हैं जो वो चाहेंगे वैसा ही होगा.