1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 03, 2026, 11:02:25 AM
- फ़ोटो
Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब मरीजों की खून जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जांच की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और सटीक हो जाएगी।
इस नई व्यवस्था की शुरुआत भागलपुर के मशहूर मायागंज अस्पताल से होने जा रही है। यह अस्पताल अब राज्य का पहला ऐसा अस्पताल बनने वाला है, जहां AI आधारित पैथोलॉजी जांच प्रणाली लागू होगी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस नई तकनीक के तहत अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये मशीनें इतनी सक्षम होंगी कि एक घंटे में सैकड़ों सैंपल की जांच कर सकेंगी। इससे मरीजों को लंबी कतारों और घंटों इंतजार से राहत मिलेगी। खासकर उन मरीजों को ज्यादा फायदा होगा, जिन्हें तुरंत रिपोर्ट की जरूरत होती है।
इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि हर मरीज को एक यूनिक जांच आईडी दी जाएगी। यह आईडी मरीज के लिए एक तरह का डिजिटल रिकॉर्ड होगी, जिसके जरिए वह अपनी जांच से जुड़ी हर जानकारी आसानी से देख सकेगा। सैंपल लेने के साथ ही उसे सिस्टम में दर्ज कर लिया जाएगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से आगे बढ़ेगी।
जैसे ही जांच पूरी होगी, मरीज के मोबाइल पर मैसेज के जरिए रिपोर्ट की जानकारी भेज दी जाएगी। यानी अब रिपोर्ट लेने के लिए बार-बार अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे मरीजों का समय भी बचेगा और भीड़ भी कम होगी।
डॉक्टरों के लिए भी यह तकनीक काफी फायदेमंद साबित होगी। वे मरीज की रिपोर्ट ऑनलाइन ही देख सकेंगे, जिससे बीमारी का सही आकलन जल्दी हो पाएगा और इलाज में देरी नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर मरीज को सीधे ओपीडी या इमरजेंसी विभाग में भेजा जा सकेगा, जिससे गंभीर मामलों में तुरंत कार्रवाई संभव हो पाएगी।
AI तकनीक का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसमें मानवीय गलती की संभावना काफी कम हो जाती है। मशीनें डेटा का विश्लेषण बहुत तेजी और सटीकता से करती हैं, जिससे रिपोर्ट की गुणवत्ता बेहतर होती है। इससे मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
फिलहाल इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। इसके शुरू होते ही भागलपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के मरीजों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में यह बदलाव बिहार के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इस तरह की तकनीक लागू की जा सकती है, जिससे पूरे सिस्टम को हाईटेक और बेहतर बनाया जा सके।