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22 साल बाद भारतीय सेना से रिटायर हुए नरेश प्रसाद, नक्सल प्रभावित गांव में हुआ भव्य स्वागत

गया के नक्सल प्रभावित इमामगंज के देवजरा गांव के पहले सरकारी नौकरी पाने वाले नरेश प्रसाद 22 साल भारतीय सेना में सेवा के बाद रिटायर होकर गांव लौटे, जहां ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 05, 2026, 3:39:00 PM

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- फ़ोटो social media

GAYA: गया मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित इमामगंज प्रखंड के देवजरा गांव निवासी नरेश प्रसाद भारतीय सेना से 22 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर जब अपने गांव लौटे, तो ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। गांव पहुंचने से पहले ही ढोल-नगाड़ों और डीजे के साथ लोग कई किलोमीटर तक पैदल चलकर उनके स्वागत में शामिल हुए। फूल-मालाओं से लदे नरेश प्रसाद यह सम्मान देखकर भावुक हो गए और पूरे गांव में देशभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही।


नरेश प्रसाद हवलदार के पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में भारतीय सेना जॉइन की थी और 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हुए। वे अपने गांव के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें सरकारी नौकरी मिली थी। नरेश प्रसाद गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बने और उनके कारण गांव के 50 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।


सेना में सेवा के दौरान नरेश प्रसाद को पुंछ सेक्टर सहित कई संवेदनशील इलाकों में काम करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि एक बार आतंकवादियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया था, लेकिन सूझ-बूझ और साहस के साथ एके-47 से जवाब देकर आतंकियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। कुछ देर बाद उनकी बटालियन भी वहां पहुंच गई।


ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्हें आतंकियों से मुठभेड़ का सामना करना पड़ा। इस ऑपरेशन में उनके एक साथी, जो मुंबई के रहने वाले थे, शहीद हो गए। नरेश प्रसाद ने बताया कि उस समय वे तीन दिनों तक बिना सोए केवल पानी पीकर ड्यूटी करते रहे थे। ऑपरेशन सिंदूर के लिए उन्हें अंबाला से सांबा भेजा गया था। 22 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद अब नरेश प्रसाद का सपना है कि वे गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उन्हें आगे बढ़ाएं और समाज सेवा से जुड़े रहें।

गया से नितम राज की रिपोर्ट