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Aadhaar Card : आधार में जन्मतिथि सुधार पर हाईकोर्ट सख्त, बोला—वैध दस्तावेज हों तो तुरंत करें बदलाव, बड़े अधिकारी को किया तलब

पटना हाईकोर्ट ने आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि वैध दस्तावेज होने पर तुरंत सुधार किया जाए, जिससे लोगों को राहत मिले।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 04, 2026, 7:33:26 AM

Aadhaar Card : आधार में जन्मतिथि सुधार पर हाईकोर्ट सख्त, बोला—वैध दस्तावेज हों तो तुरंत करें बदलाव, बड़े अधिकारी को किया तलब

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Patna High Court ने आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब आवेदक के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तो अधिकारियों को सुधार करने में देरी नहीं करनी चाहिए। अदालत ने इस स्थिति को “खेदजनक” बताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।


यह मामला प्रशांत रजक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को सही कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के आधार में जन्मतिथि 24 जुलाई 2008 दर्ज थी, जबकि उनके मैट्रिक प्रमाणपत्र के अनुसार सही जन्मतिथि 24 जुलाई 2007 है। इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए उन्होंने संबंधित विभाग में आवेदन दिया था, लेकिन लंबे समय तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।


मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति Justice Ajit Kumar की एकलपीठ ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर यूआईडीएआई के क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष उपस्थित हों। साथ ही अदालत ने निदेशक को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवश्यक सुधार जल्द से जल्द किया जाए।


सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जन्मतिथि में बदलाव की प्रक्रिया के लिए आवेदक को Unique Identification Authority of India (यूआईडीएआई) के पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन देना होगा। वहां दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही सुधार संभव है। हालांकि कोर्ट ने इस प्रक्रिया में हो रही देरी और लापरवाही पर असंतोष जताया।


अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुधार करना चाहिए, ताकि आम लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना न पड़े। कोर्ट ने यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय को निर्देश दिया कि वह स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों का त्वरित समाधान हो सके और लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।


दरअसल, आधार कार्ड में जन्मतिथि से जुड़ी त्रुटियों के कई मामले लंबे समय से लंबित पड़े हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने दस्तावेजों में सुधार कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर राहत नहीं मिल पा रही है। इस कारण आम नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर तब जब आधार कार्ड आज के समय में एक महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज बन चुका है।


आधार कार्ड, जिसे Unique Identification Authority of India द्वारा जारी किया जाता है, एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है। यह व्यक्ति के बायोमेट्रिक डेटा जैसे उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली (आईरिस) के साथ-साथ जनसांख्यिकीय जानकारी पर आधारित होता है। यह दस्तावेज देशभर में मान्य है और पहचान के एक विश्वसनीय साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।


आज के दौर में आधार कार्ड का उपयोग कई आवश्यक कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे बैंक खाता खोलना, मोबाइल सिम लेना, सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना और आयकर रिटर्न दाखिल करना। इसके अलावा कई मामलों में पासपोर्ट, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों के विकल्प के रूप में भी आधार का उपयोग किया जाता है।


आधार की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली है, जिससे फर्जी या डुप्लीकेट पहचान को रोकने में मदद मिलती है। यह प्रणाली ऑनलाइन प्रमाणीकरण के माध्यम से कहीं भी और कभी भी पहचान सत्यापित करने की सुविधा देती है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ती है।


पटना हाईकोर्ट के इस आदेश से उन लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो आधार में गलत जन्मतिथि या अन्य जानकारी को ठीक कराने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग इस मामले में तेजी दिखाएंगे और लोगों को समय पर सेवा प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।