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पटना में दवा घोटाले का भंडाफोड़… करोड़ों की सरकारी दवाइयां गोदाम से बरामद, एक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

Bihar News: पटना में पुलिस ने सरकारी दवाइयों की अवैध जमाखोरी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। किराए के गोदाम से भारी मात्रा में कफ सिरप और अन्य दवाइयों की बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और इस पूरे मामले की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 07, 2026, 5:31:46 PM

पटना में दवा घोटाले का भंडाफोड़… करोड़ों की सरकारी दवाइयां गोदाम से बरामद, एक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

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Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने सरकारी दवाइयों की अवैध जमाखोरी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जहां एक किराए के गोदाम से भारी मात्रा में दवाइयां बरामद होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।


पुलिस की छापेमारी के दौरान गोदाम से करीब 5 हजार कफ सिरप की बोतलें, एंटीबायोटिक समेत कई तरह की सरकारी दवाइयां जब्त की गईं, जिनकी अनुमानित कीमत 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं बल्कि बड़े स्तर पर चल रहा अवैध धंधा था।


जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे जयंत कुमार और नीरज कुमार का हाथ बताया जा रहा है, जिन्होंने मिलकर यह गोदाम किराए पर लिया था और यहीं से सरकारी दवाइयों की अवैध तरीके से स्टॉकिंग और सप्लाई का काम किया जा रहा था, हालांकि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जयंत कुमार को मौके से गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी नीरज कुमार फरार बताया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बरामद कफ सिरप और अन्य दवाइयों के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि ऐसी दवाइयों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में भी किया जाता है, इसी को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ NDPS Act समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।


इस पूरे मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां आखिर कहां से आईं और क्या इसमें किसी सरकारी कर्मचारी की भी मिलीभगत है, क्योंकि बिना अंदरूनी मदद के इतनी बड़ी खेप का बाहर आना मुश्किल माना जा रहा है, ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।


फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन दवाइयों को कहां सप्लाई किया जाना था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।