1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 04, 2026, 10:21:03 AM
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Bihar School News : बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बीएड-डीएलएड जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां, टीईटी-सीटीईटी जैसी कठिन परीक्षाएं, नियुक्ति के बाद लंबी ट्रेनिंग और समय-समय पर होने वाले रिफ्रेशर कोर्स—इन सबके बावजूद बच्चों की बुनियादी शिक्षा कमजोर बनी हुई है। हाल ही में शिक्षा विभाग की रिपोर्ट ने इस सच्चाई को साफ कर दिया है कि कक्षा 3 से 6 तक के कई छात्र अब भी जोड़, घटाव, गुणा, भाग और भाषा की बुनियादी समझ में पिछड़ रहे हैं।
यानी सवाल सीधा है—इतनी तैयारी और प्रशिक्षण के बाद भी नतीजे ‘सिफर’ क्यों?
इसी चुनौती से निपटने के लिए अब शिक्षा विभाग ने एक नया प्रयोग शुरू किया है। इस पहल के तहत अब हर शनिवार को शिक्षक ‘संकुल’ यानी क्लस्टर स्तर पर इकट्ठा होकर पढ़ाने के बेहतर तरीके सीखेंगे और एक-दूसरे के अनुभव साझा करेंगे। इसे पारंपरिक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि ‘अनुभवों का आदान-प्रदान’ कहा जा रहा है।
राज्य के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के मुताबिक, यह पहल शिक्षकों को एक ऐसा मंच देगी जहां वे अपनी समस्याएं, अनुभव और समाधान साझा कर सकेंगे। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया शिक्षकों को ज्यादा व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से पढ़ाने में मदद करेगी।
कैसे होगी शनिवार की बैठक?
हर शनिवार होने वाली यह बैठक कुल 2 घंटे 15 मिनट की होगी और इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है।
पहला चरण (15 मिनट):
कक्षा 1 से 3 तक के शिक्षक दिए गए एजेंडे और निर्देशों पर चर्चा करेंगे। इसमें शुरुआती कक्षाओं की सीखने की चुनौतियों पर फोकस रहेगा।
दूसरा चरण (60 मिनट):
इस सत्र में पाठ्यपुस्तकों के आधार पर पढ़ाने के तरीकों और बच्चों की सीखने की प्रगति पर विस्तार से चर्चा होगी। खासतौर पर भाषा और गणित को मजबूत करने के लिए नए तरीके और रजिस्टर बनाने जैसे सुझावों पर काम किया जाएगा।
तीसरा चरण (60 मिनट):
यह सबसे अहम हिस्सा होगा, जहां शिक्षक अपनी ‘पाठ योजना’ (Lesson Plan) साझा करेंगे। इसमें इस बात पर जोर दिया जाएगा कि पढ़ाई को रोचक कैसे बनाया जाए, और छात्रों के पहले से मौजूद ज्ञान को नई पढ़ाई से कैसे जोड़ा जाए।
रोस्टर भी तय, हर हफ्ते अलग शिक्षक
इस पहल को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए विषयवार रोस्टर भी तैयार किया गया है।
पहला शनिवार: कक्षा 1, 2 और 3 के शिक्षक
दूसरा शनिवार: कक्षा 4 और 5 के शिक्षक
तीसरा शनिवार: भाषा और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक
चौथा शनिवार: गणित और विज्ञान के शिक्षक
बताया जा रहा है कि हर शनिवार राज्य भर के करीब एक लाख शिक्षक इस मंथन का हिस्सा बनेंगे।
क्या बदलेगा इससे?
इस नई पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों के ‘माइंडसेट’ को समझना है। अब फोकस सिर्फ किताब खत्म करने पर नहीं, बल्कि यह समझने पर होगा कि बच्चा सीख कैसे रहा है। शिक्षक अब केवल पढ़ाएंगे नहीं, बल्कि यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि कौन-सा तरीका बच्चों के लिए ज्यादा असरदार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सही तरीके से लागू होती है, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है। क्योंकि असली बदलाव तभी आएगा जब शिक्षक अपने अनुभवों से सीखेंगे और उसे कक्षा में लागू करेंगे।अब देखना यह है कि यह ‘शनिवार मंथन’ बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देता है या फिर यह भी कागजों तक सीमित रह जाता है।