Hindi News / bihar / patna-news / medicine price hike : 1 अप्रैल से दवाएं महंगी! पेरासिटामोल-एंटीबायोटिक के बढ़ेंगे दाम,...

medicine price hike : 1 अप्रैल से दवाएं महंगी! पेरासिटामोल-एंटीबायोटिक के बढ़ेंगे दाम, जानिए कितना पड़ेगा असर

medicine price hike : 1 अप्रैल 2026 से जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं। पेरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स समेत 1000 से ज्यादा दवाएं महंगी होंगी, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 26, 2026, 8:21:38 AM

medicine price hike : 1 अप्रैल से दवाएं महंगी! पेरासिटामोल-एंटीबायोटिक के बढ़ेंगे दाम, जानिए कितना पड़ेगा असर

- फ़ोटो

medicine price hike : 1 अप्रैल 2026 से आम लोगों की जेब पर एक और असर पड़ने जा रहा है। सरकार ने आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है, जिससे पेरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और कई अन्य जरूरी दवाएं महंगी हो जाएंगी। यह बढ़ोतरी भले ही मामूली दिखे, लेकिन इसका असर देशभर में करोड़ों मरीजों पर पड़ेगा।


दरअसल, सरकार के अधीन काम करने वाली राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची यानी National List of Essential Medicines (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% तक इजाफा करने की अनुमति दी है। यह बदलाव 1,000 से ज्यादा दवाओं पर लागू होगा, जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा के इलाज में किया जाता है।


NPPA के अनुसार, यह मूल्य वृद्धि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में WPI में 0.64956% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी के अनुरूप दवाओं की कीमतों को समायोजित करने का फैसला लिया गया है।


गौरतलब है कि NLEM में शामिल दवाओं की कीमतों में बदलाव साल में केवल एक बार ही किया जाता है। इस सूची में वे दवाएं शामिल होती हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। इनमें बुखार के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पेरासिटामोल, बैक्टीरियल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन, एनीमिया की दवाएं, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा, कोविड-19 के मध्यम से गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ स्टेरॉयड और अन्य दवाएं भी इस सूची का हिस्सा हैं।


हालांकि, फार्मा उद्योग का कहना है कि यह बढ़ोतरी उनकी बढ़ती लागत के मुकाबले काफी कम है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) और अन्य जरूरी रसायनों की कीमतों में भारी उछाल आया है। खासकर ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लागत में तेजी से वृद्धि हुई है।


उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में APIs की कीमतों में औसतन 30 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ग्लिसरीन की कीमत में 64% तक उछाल आया है, जो सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। इसी तरह, पेरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत में करीब 25% और सिप्रोफ्लोक्सासिन में 30% तक वृद्धि दर्ज की गई है।


केवल कच्चा माल ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग लागत भी तेजी से बढ़ी है। पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और एल्युमीनियम फॉयल जैसी सामग्री, जो दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होती है, उनकी कीमतों में भी करीब 40% तक का इजाफा हुआ है। इससे दवा कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।


फार्मा उद्योग से जुड़े एक प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकॉल और अन्य सॉल्वैंट्स, जो सिरप और ड्रॉप्स जैसी दवाओं में उपयोग होते हैं, काफी महंगे हो गए हैं। इसके अलावा, इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में उद्योग को लगता है कि 0.6% की यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है और वे NPPA के सामने अपनी मांग रखेंगे।


कुल मिलाकर, भले ही सरकार ने सीमित बढ़ोतरी की अनुमति दी है, लेकिन इसका असर आम लोगों की जेब पर जरूर पड़ेगा। खासकर उन मरीजों पर इसका अधिक प्रभाव होगा, जो नियमित रूप से इन जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि बढ़ती लागत और सीमित मूल्य वृद्धि के बीच फार्मा उद्योग और सरकार के बीच संतुलन कैसे बनता है।