1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 9:29:43 AM
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BIHAR NEWS : बिहार की राजधानी पटना में ईद के मौके पर जहां एक ओर जश्न और भाईचारे का माहौल दिखा, वहीं दूसरी ओर राजनीति के गलियारों में एक नई हलचल भी देखने को मिली। इस बार ईद की नमाज के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया। करीब दो दशकों में पहली बार ऐसा हुआ जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar गांधी मैदान में मौजूद नहीं रहे। उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र Nishant Kumar ने कार्यक्रम में शिरकत की।
निशांत कुमार की यह मौजूदगी अपने आप में खास मानी जा रही है, क्योंकि अब तक वे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखते थे। लेकिन हाल के महीनों में उनके तेवर और गतिविधियों में स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। जेडीयू से जुड़ने के बाद से ही वे लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं, जिसे उनके ‘पॉलिटिकल ट्रेनिंग’ के तौर पर देखा जा रहा है।
ईद की नमाज खत्म होने के तुरंत बाद निशांत कुमार का अगला कदम और भी ज्यादा चर्चा में आ गया। वे गांधी मैदान से सीधे केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता Lalan Singh के आवास पहुंच गए। यहां दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। इस मुलाकात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो इस बैठक में पार्टी की मौजूदा स्थिति, आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से यह मुलाकात अचानक और निजी तौर पर हुई, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींच लिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निशांत कुमार का इस तरह वरिष्ठ नेताओं से मिलना और सीधे संवाद करना यह संकेत देता है कि उन्हें धीरे-धीरे राजनीति के मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। खासकर ऐसे समय में जब जेडीयू को नए चेहरे और नई ऊर्जा की जरूरत महसूस हो रही है, निशांत की सक्रियता पार्टी के लिए अहम साबित हो सकती है।
दूसरी ओर, Nitish Kumar का ईद जैसे बड़े अवसर पर गांधी मैदान में न पहुंचना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि इसके पीछे स्वास्थ्य या अन्य व्यस्तताओं को कारण बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक नजरिए से इसे एक ‘संक्रमण काल’ के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, गांधी मैदान से शुरू होकर ललन सिंह के आवास तक पहुंची यह कहानी सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में निशांत कुमार की भूमिका और अधिक स्पष्ट हो सकती है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।