1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 25 Jan 2026 09:20:05 AM IST
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NEET student death : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ रेप-मौत मामले में बड़ा असर हुआ है। पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुआं के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने माना है कि केस में निचले स्तर पर लापरवाही बरती गई है, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई की गई।
आरोप है कि घटना के पहले दिन से ही चित्रगुप्त नगर SHO को पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा किया। यहां तक कि तीन दिन बाद कार्रवाई शुरू की और वरिष्ठ अधिकारियों को भी गलत जानकारी दी। जिससे जांच में काफी परेशानी हुई। इसके अलावा फॉरेंसिक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात कही गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हो रही है।
वहीं, इस कार्रवाई के बाद अब ASP अभिनव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब यह सवाल किया जा रहा है कि इस मामले में ASP पर कब कार्रवाई होगी। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि उन्होंने सबसे पहले मीडिया में आकर बयान दिया था कि छात्रा की मौत की वजह नींद की गोली का सेवन है। उन्होंने उस समय सीधे यह खारिज कर दिया था कि लड़की के साथ कोई यौन हिंसा हुई है।
ASP अभिनव ने कहा था कि—“देखिए, 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में सूचना मिली थी कि एक बच्ची, जो 18 साल की है, वह अस्पताल में कोमा में है और उसके परिजन उसके साथ मारपीट और सेक्सुअल असॉल्ट की शिकायत दर्ज करवा रहे हैं। उनकी शिकायत पर विधिवत एक FIR, FIR संख्या 14/26, चित्रगुप्त नगर थाने में दर्ज की गई थी।
अब तक की जांच से जो सामने आया है, डॉक्टर का कहना है कि उनके ऊपर सेक्सुअल असॉल्ट नहीं किया गया है। बच्ची के कमरे से हमें नींद की बहुत सारी गोलियां बरामद हुई हैं। मेडिकल हिस्ट्री देखने पर डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने बल्क मात्रा में नींद की गोली खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। साथ ही डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मियादी बुखार भी था। उनका कंडीशन बिगड़ने पर उन्हें प्रभात अस्पताल, कदमकुआं से मेदांता शिफ्ट किया गया, जहां आज सुबह उनकी मृत्यु हो गई।”
“प्रथम दृष्टया डॉक्टरों द्वारा यह इनकार किया गया है और लिखित में भी दिया गया है। वीडियो में भी ई-साक्ष्य में उनका बयान दर्ज है, जो गायनी की डॉक्टर थी। उनका कहना है कि बच्ची के साथ सेक्सुअल असॉल्ट नहीं हुआ है। प्राइवेट पार्ट पर किसी प्रकार का चोट, जख्म या असॉल्ट का कोई भी संकेत नहीं मिला है। लेकिन बच्ची के कंधे पर चोट का निशान है। बच्ची अपने कमरे के अंदर बेहोशी की हालत में मिली थी। जब वह हॉस्टल में ब्रेकफास्ट और लंच के लिए नहीं आई, तो संचालिका और वहां मौजूद अन्य लोगों ने दरवाजा जबरदस्ती तोड़कर देखा। अंदर वह बेहोशी की हालत में मिली। वहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां से वह कोमा में चली गई और इसी से आज यह दुखद सूचना मिली।”
“सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई है। हॉस्टल में कई सीसीटीवी कैमरे थे, जिनमें अब तक कोई फॉल्ट नहीं मिला है। घटना में प्रेम प्रसंग का कोई संकेत नहीं मिला है। इतिहास में हमें यह मिला है कि वह आत्महत्या के तरीके ढूंढती हुई पाई गई थी। यह अभी जांच का विषय है। मौत का कारण क्या है—फीवर (मियादी बुखार) या नींद की दवा का ओवरडोज—यह जांच जारी है।”
“कदमकुआं थाना को उसी समय बताया गया था जब वह 6 जनवरी को वहां गई थी, देर रात में। लेकिन उस समय मेडिकल, अस्पताल और परिजनों का कहना था कि जांच-इलाज चल रहा है। हमें तब कोई फॉल्ट नहीं लगा। जब उनका कंडीशन बिगड़ा तब चित्रगुप्त नगर थाना को भी शामिल किया गया और तभी जांच शुरू हुई। 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने को सूचना मिली। उसी दिन FIR दर्ज कर ली गई थी। परिजनों के बयान के आधार पर विधिवत FIR दर्ज की गई और जांच जारी है।”
“हॉस्टल संचालक/संचालिका का भी बयान लिया गया है। ई-साक्ष्य में उनका वीडियो भी अपलोड किया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने परिजनों को बताया और जल्दी से बच्ची को अस्पताल ले गए। परिजन आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने लोकल पुलिस को सूचना दी। परिजन आखिर आरोप क्यों लगा रहे हैं—यह जांच का विषय है।”
“हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। बच्ची 5 तारीख को घर से लौटकर आई थी। कितने दिनों तक घर पर थी? क्यों बच्ची ऐसा सर्च कर रही थी? बच्ची की हिस्ट्री क्या है? उसके कमरे से सटे अन्य बच्चों के कमरे भी हैं। पूरे हॉस्टल में लड़कियां हैं, किन्हीं द्वारा कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी गई। यह सब जांच का विषय है।”
“मोबाइल की जांच की गई है, उसमें कुछ निकला है। यह जांच का विषय है। कमरे को देखकर आत्महत्या की संभावना है। उसने सर्च किया था—गूगल पर नींद की दवा का ओवरडोज और आत्महत्या कैसे करें—इस तरह की सर्च मिली है। कारण क्या था, क्यों ऐसा सर्च कर रही थी, यह जांच का विषय है।”
“कंधे पर चोट क्यों है? क्या नींद की गोली खाकर गिरने से लगी या पहले से थी? यह भी जांच का विषय है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी हमारे पास नहीं मिली है। इसलिए सारा विवरण आने दें, हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। सुसाइड नोट मिला है? नहीं, कमरे को अच्छे से खंगाला गया, कोई नोट नहीं मिला। बच्ची NEET की तैयारी कर रही थी और वहां सब कुछ सामान्य पाया गया।”
“पुलिस नींद की दवा कहां से लाई, उसका पता लगाएगी। परिजनों की जानकारी में था कि बच्ची नींद की दवा लेती है, पर परिजन ने ऐसा नहीं बताया। इसलिए यह सवाल है कि बच्ची ने नींद की गोली क्यों ली? किस तनाव में थी? चोट हॉस्टल में आने पर लगी—5 तारीख को लौटकर हॉस्टल आई थी। उसी साल में आई थी। 5 को आई थी और 6 को सुबह ऐसा पाया गया। 5 की शाम को डिनर के समय वह स्वस्थ थी।”“हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं और उसके बाद ही अगली कार्रवाई या जानकारी साझा करेंगे। अभी तक कोई प्रेम प्रसंग का मामला सामने नहीं आया है।”
14 को जब हंगामा कारिगल चौक पर हुआ, तब उन्होंने कहा कि वीडियो ग्राफी पर बच्ची का पोस्टमार्टम हुआ है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। अब तक की रिपोर्ट में यौन हिंसा का कोई संकेत नहीं मिला है। बच्ची की यूरिन रिपोर्ट में नींद की दवा का ओवरडोज पाया गया। सर्च हिस्ट्री में 24 और 5 तारीख को नींद की दवा का असर और आत्महत्या कैसे करें, ऐसा सर्च मिला। जांच के लिए बहुत सारे बिंदु हैं। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। बच्ची किसी दबाव में थी, कंधे पर चोट के निशान हैं, कुछ स्क्रैचेज भी हैं। यह जांच का विषय है। साक्षियों के साथ जो भी कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।”
“मेरी लोगों से एक विनती है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई अफवाह फैल रही है कि बच्ची का गैंगरेप हुआ है—यह बिल्कुल झूठ है। मेरा सभी से निवेदन है कि साक्ष्य के आधार पर ही कुछ बोले।”जबकि ASP स्तर पर केस की री-एप्रेजल होती है। यह देखा जाता है कि शुरुआती जांच में कोई एंगल छूटा तो नहीं है। उन्हें चाहिए था कि वे 6–9 जनवरी की पुलिस गैरहाजिरी पर सवाल उठाते और हॉस्टल की दोबारा जांच के आदेश देते। इसी के साथ NEET छात्रा का बयान भी लेना चाहिए था, जैसे—उसके शरीर पर चोट कैसे लगी, प्राइवेट पार्ट में चोट है या नहीं।
लेकिन, ASP अभिनव कुमार ने थाना प्रभारी की रिपोर्ट को ही आधार मान लिया। न कमरे की फॉरेंसिक जांच कराई गई, न नए सिरे से संदिग्ध जोड़े गए। यह वह समय था जब केस को सही दिशा में मोड़ा जा सकता था, लेकिन कैज़ुअल एप्रोच से ही काम किया गया। ऐसा मान लिया गया कि मामला सुसाइड का है और दब जाएगा।
इधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने छात्रा का पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड से कराया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के निशान और यौन हिंसा से जुड़े मेडिकल संकेत सामने आए। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा। पुलिस का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञों की राय के बाद ही तय किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जब सभी रिपोर्ट में यौन हिंसा की बात आई तो इससे पहले ASP किन आधार पर बिना पोस्टमार्टम के यह बता दिया कि लड़की के साथ यौन हिंसा नहीं हुई है।