Bihar Bhumi: डीसीएलआर-सीओ ने सौदा में क्या पाया..? पूर्व और बाद के अफसरों की रिपोर्ट से ही 3 अधिकारी हो गए बेपर्द, जांच के बाद कार्रवाई तय

Bihar Bhumi: पूर्वी चंपारण में 2022 में डीसीएलआर और दो सीओ ने “बकास्त वृत्तदार बाजार” सरकारी जमीन से ‘बाजार’ शब्द हटाकर करोड़ों की जमीन पर सरकार की स्थिति कमजोर कर दी. पूर्व की सभी रिपोर्ट ने खेल की पोल खोल दी है.

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Sun, 25 Jan 2026 03:52:02 PM IST

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar Bhumi: पूर्वी चंपारण में डीसीएलआर और दो अंचल अधिकारियों ने मिल कर करोड़ों की बेशकीमती सरकारी जमीन का सौदा कर लिया. तीनों अधिकारियों ने मिलकर जमीन का प्रकार ही बदल दिया. हालांकि इन अधिकारियों की चालाकी धरी गई है. पूर्व के तमाम रिपोर्ट चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि 2022 में जिन अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार किया, उसमें बड़े स्तर पर खेल किया गया . पूर्व के अधिकारियों ने भी उक्त विवादित जमीन ( लगभग 2 एकड़) को “बकास्त वृत्तदार बाजार” बताया. उक्त तीनों अधिकारियों के बाद वाले अफसरों ने भी उक्त जमीन को “बकास्त वृत्तदार बाजार” ही बताया है. सिर्फ 2022 में  दो सीओ और डीसीएलआर वाली जांच टीम ने उक्त जमीन को “बकास्त वृत्तदार बताया है. यानि सीओ-डीसीएलआर वाली जांच टीम ने जमीन के प्रकार से ''बाजार'' शब्द हटा दिया. इस तरह से एक शब्द हटाकर 2 सीओ और 1 डीसीएलआर ने बहुत बड़ा खेल किया.  

डीसीएलआर-सीओ वाली जांच टीम ने 2022 में किया खेल 

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के अरेराज अनुमंडल के तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता और तत्कालीन दो अंचल अधिकारियों की टीम ने वर्ष 2022 में हरसिद्धी बाजार की  “बकास्त वृत्तदार बाजार” किस्म की विवादित लगभग 1 एकड़ 98 डिसमिल जमीन पर से सरकार की स्थिति कमजोर कर दी. इतना ही नहीं इस रिपोर्ट के आधार पर 2020 से चल रहे अतिक्रमणवाद को खत्म करा दिया. दोनों सीओ और डीसीएलआर ने एडीएम को भेजी रिपोर्ट में उक्त जमीन को सिर्फ “बकास्त वृत्तदार बताया. यानि प्रकार से ''बाजार” शब्द हटा दिया. जबकि इसके पहले के तमाम अंचल अधिकारियों ने उक्त विवादित जमीन जिस पर कुछ लोग कब्जा कर बैठे हैं, उसे “बकास्त वृत्तदार बाजार” बताया है. वर्ष 2021 में हरसिद्धी के तत्कालीन अंचल अधिकारी ने उक्त जमीन को ''बकास्त वृतदार बाजार'' बताते हुए एडीएम से मार्गदर्शन मांगा था. 

मई 2021 में सीओ की रिपोर्ट- उक्त जमीन बकास्त वृतदार बाजार किस्म की

12 मई 2021 को अपर समाहर्ता मोतिहारी को भेजे पत्र में अंचल अधिकारी हरसिद्धी ने उक्त विवादित जमीन को ''बकास्त वृतदार किस्म बाजार'' करके सर्वे खतियान में दर्ज होने का जिक्र किया है. सीओ ने उक्त विवादित भूमि के संबंध में दिशा निर्देश की मांग किया था. अपर समाहर्ता को लिखे पत्र में अंचल अधिकारी ने मार्गदर्शन मांगा . हरसिद्धी की उक्त विवादित जमीन जिस पर अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अतिक्रमणवाद 42/2019-20 कर उक्त भूमि के विवरण की जांच कराई गई। सीओ के पत्र में उल्लेख है कि...हल्का कर्मचारी की जांच रिपोर्ट के अनुसार मौजा हरसिद्धी के उक्त खाता-खेसरा की जमीन सर्वे खतियान में ''बकास्त वृतदार किस्म बाजार'' करके दर्ज है. हल्का कर्मचारी के प्रतिवेदन के आधार पर उक्त भूमि की पैमाइश अंचल अमीन से कराई गई। पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों को नोटिस दिया गया. दो लोगों ने नोटिस के बाद कागजात प्रस्तुत किए, जिसमें उक्त जमीन जो उनके कब्जे में है, वह सर्वे खतियान में बकास्त वृतदार किस्म बाजार करके दर्ज है. जबकि इनलोगों के द्वारा आवेदन देकर बताया गया कि उक्त जमीन उनलोगों की है. उक्त जमीन खतियान के सर्वेहाल में बकास्त वृतदार करके दर्ज है.इसके बाद हरसिद्धी अंचल के सीओ ने अपर समाहर्ता से इस पर मार्गदर्शन मांगा. 

खेल में शामिल अधिकारी हो गए बेपर्द 

पूर्वी चंपारण जिले के संबंधित अनुमंडल के SDO ने वर्ष 2024 में हरसिद्धी की विवादित जमीन का जांच प्रतिवेदन जिलाधिकारी को समर्पित किया . एसडीओ ने उक्त विवादित भूखंडों की जांच हल्का कर्मचारी एवं अंचल अमीन से कराई. हल्का कर्मचारी एवं अंचल अमीन की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अंचलाधिकारी हरसिद्धि ने सभी दखल कब्जा करने वालों को नोटिस जारी किया था. इसके बाद दखलकारों द्वारा भूमि से संबंधित उपलब्ध कराए गए साक्ष्य पर तत्कालीन अंचल अधिकारी ने 2021 में पूर्वी चंपारण के अपर समाहर्ता से मार्गदर्शन मांगा था. एडीएम से मार्गदर्शन मांगा गया था कि उक्त भूमि को रैयती माना जाए या नहीं ? इसके बाद वर्ष 2022 में भी तत्कालीन अंचल अधिकारी ने अपर समाहर्ता से उक्त भूमि के रैयती होने या ना होने के संबंध में स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा. इस आलोक में अपर समाहर्ता ने मई 2022 में ही भूमि सुधार उपसमहर्ता अरेराज, अंचलाधिकारी हरसिद्धी और अरेराज की त्रिस्तरीय जांच समिति गठित की थी .

DCLR-CO की रिपोर्ट पर करोड़ों की विवादित जमीन से अतिक्रमणवाद को किया गया था ड्रॉप

2024 में जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया था कि अंचल अधिकारी हरसिद्धि एवं अरेराज के संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में उक्त खाता- खेसरा की भूमि पर अतिक्रमणवाद चलाना उचित नहीं है . भूमि सुधार उप समाहर्ता की यह रिपोर्ट अंचलाधिकारी हरसिद्धि को नहीं भेजने की वजह से हरसिद्धी अंचल अधिकारी ने 2024 में ही अपर समाहर्ता से मार्गदर्शन मांगा . अपर समाहर्ता ने जुलाई 2024 में अंचलाधिकारी हरसिद्धि को भूमि सुधार उप समाहर्ता के पत्र का उल्लेख करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा. इसके बाद अंचल अधिकारी ने जुलाई 2024 में ही उक्त भूमि जो “बकास्त वृत्तदार बाजार” किस्म की है, उस पर चल रहे अतिक्रमणवाद को ड्रॉप कर दिया .

DM को भेजी गई रिपोर्ट- उक्त भूमि का किस्म ''बकास्त वृतदार बाजार'' 

वर्ष 2024 में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उपसमाहर्ता की तरफ से कहा गया है कि हरसिद्धि में अवस्थित उक्त विवादित 'खाता-खेसरा' की भूमि को सार्वजनिक भूमि से 'इतर' भूमि घोषित करने का अनुरोध किया गया है. उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर उक्त भूमि के सार्वजनिक भूमि नहीं होने या रैयती भूमि होने के संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष निकालना संभव प्रतीत नहीं है. ऐसा इसलिए क्यों कि उक्त भूमि का किस्म ''बकास्त वृतदार बाजार'' है। साथ ही इस भूमि पर विभिन्न व्यक्ति के नाम से जमाबंदी कायम है.

सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को खूब हुआ था आंदोलन 

जिनके कंधों पर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की जिम्मेदारी है, वे नहीं चाहते कि जमीन की वापसी हो.जमीन निजी हाथों में ही रहे, इसके लिए तरह-तरह के खेल किए जा रहे हैं. उक्त जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर काफी आंदोलन हुए. मामला कोर्ट में भी गया. खेल को उजागर करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले एक शख्स की हत्या भी हो गई. पिता की हत्या में शामिल अपराधियों को सजा दिलाने और अतिक्रमित सरकारी जमीन से कब्जा हटाने को लेकर शख्स के पुत्र ने आत्मदाह कर लिया. इस तरह से इस मामले में दो लोगों की जान चली चली गई, पर विवाद जस का तस कायम है. हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने उक्त विवादित जमीन का प्रकार बदलकर कब्जाधारी के पक्ष में काम किया.  

खबर की अगली कड़ी में बतायेंगे कि कैसे तत्कालीन 2 अंचल अधिकारियों ने एक साथ और तत्कालीन डीसीएलआर ने अपनी रिपोर्ट अलग से भेजी. हालांकि तीनों ने जमीन का प्रकार बदलकर ही अपनी रिपोर्ट अपर समाहर्ता को भेजी थी.