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ईरान युद्ध का असर अब किचन से लेकर बेडरूम तक, भारत में कंडोम के दाम बढ़ने की आशंका; सप्लाई चेन प्रभावित

ईरान युद्ध और पेट्रोकेमिकल सप्लाई में रुकावट के कारण भारत में कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका, कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 01, 2026, 1:45:09 PM

Iran war impact

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Iran War Impact: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखने लगा है। तेल और गैस के बाद अब कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसकी मुख्य वजह पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में आई रुकावट बताई जा रही है।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की कंडोम इंडस्ट्री लगभग 8,000 करोड़ रुपये की है और हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट्स का उत्पादन करती है। लेकिन कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले समय में कीमतें बढ़ सकती हैं।


कंडोम निर्माण के लिए सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे प्रमुख कच्चे माल की जरूरत होती है। सिलिकॉन ऑयल का उपयोग लुब्रिकेंट के रूप में होता है, जबकि अमोनिया लेटेक्स को सुरक्षित रखने में मदद करता है। 


मौजूदा वैश्विक हालात के कारण सिलिकॉन ऑयल की उपलब्धता घट गई है, वहीं अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले PVC और एल्युमिनियम फॉयल भी महंगे हो रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।


इस संकट का असर बड़ी फार्मा कंपनियों पर भी पड़ रहा है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कमी, बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। आने वाले समय में सरकार द्वारा पेट्रोकेमिकल संसाधनों के आवंटन में कटौती की स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।


विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल एक औद्योगिक समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी है। भारत में कंडोम का उपयोग परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए अहम माना जाता है। यदि कीमतें बढ़ती हैं, तो इसके उपयोग में कमी आ सकती है, जिसका असर समाज पर भी पड़ सकता है।


ईरान युद्ध का असर अब धीरे-धीरे आम जिंदगी की जरूरी चीजों तक पहुंच रहा है। LPG के बाद अब कंडोम जैसे उत्पाद की संभावित महंगाई यह दिखाती है कि वैश्विक संकट किस तरह आम लोगों की जेब और जीवन को प्रभावित कर सकता है।