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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर उज्जैन, काशी, देवघर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, हर-हर महादेव के नारे से भक्तिमय हुआ माहौल

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि के मौके पर देशभर के मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। उज्जैन, काशी, देवघर समेत देश के सभी शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

1st Bihar Published by: KHUSHBOO GUPTA Updated Feb 26, 2025, 8:08:27 AM

Mahashivratri 2025

महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब - फ़ोटो google

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्री के मौके पर देशभर के मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। उज्जैन, काशी, देवघर समेत देश के सभी शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। बम बम भोले के नारे से माहौल भक्तिमय हो गया है। देर रात से ही श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए लाइन में लगे हैं। 


सुबह की आरती के बाद काशी, उज्जैन और देवघर में मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। मंगला आरती के बाद ही काशी विश्वनाथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। भीड़ का आलम यह है कि मंदिर के बाहर एक किलोमीटर से ज्यादा की लंबी लाइन श्रद्धालुओं की लगी है।


वहीं महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उज्जैन में बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती हुई। इस पावन अवसर पर मंदिर के पट 44 घंटे तक खुले रहेंगे। इस दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन की उम्मीद है। देशभर में शिवरात्रि की धूम है, लेकिन उज्जैन में इसका अलग ही महत्व है। यहां भस्मारती, विशेष श्रृंगार और शिव नवरात्रि जैसे आयोजन होते हैं। सेहरे का प्रसाद बांटा जाता है, जिसे लोग बहुत शुभ मानते हैं। 


सुबह 3 बजे बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक हुआ और भस्मारती की गई। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व है। वहीं, 12 ज्योतिर्लिंग में से एक देवघर के बैद्यनाथ धाम में भी महाशिवरात्रि पर देश के कोने-कोने से भक्त पूजा करने पहुंचे हैं। आज मंदिर सुबह 3 बजे ही खोल दिया गया। सरदार पंडा द्वारा कांचा जल का अर्पण किया गया। फिर 4 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए भी कपाट खोले गए।