मांझी के बाद JDU ने भी कर दी बड़ी मांग, उपेंद्र कुशवाहा बोले- OBC समेत सभी कैटेगरी का आरक्षण बढ़ाए केंद्र

1st Bihar Published by: Updated Nov 13, 2022, 1:48:54 PM

मांझी के बाद JDU ने भी कर दी बड़ी मांग, उपेंद्र कुशवाहा बोले- OBC समेत सभी कैटेगरी का आरक्षण बढ़ाए केंद्र

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PATNA: झारखंड में हेमंत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आरक्षण की सीमा 77 फ़ीसदी तक बढ़ा दी है। झारखंड सरकार के इस फैसले के बाद बिहार में आरक्षण को बढ़ाने की मांग उठने लगी है। बिहार की सरकार में सहयोगी HAM के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इसको लेकर सीएम नीतीश को नसीहत दे दी है कि उन्हें झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से सीख लेनी चाहिए। मांझी के बाद अब खुद नीतीश की पार्टी जेडीयू ने भी केंद्र सरकार से मांग कर दी है कि अब जब झारखंड में 50 फीसदी का बैरियर टूट गया है तो केंद्र सरकार देशभर में ओबीसी को समेत अन्य कटेगरी के आरक्षण को बढ़ाए।


जेडीयू के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि केंद्र के स्तर पर ओबीसी के लिए देश में जो आरक्षण लागू है, उसे लागू करते समय ही काफी कटौती कर दी गई थी। तब केंद्र की तरफ से यह दलिल दी गई थी कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संभव नहीं है। देश में ओबीसी की इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद सिर्फ 27 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई। अब केंद्र सरकार ने इस बैरियर को तोड़ दिया है और कुल मिलाकर देखें तो 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की व्यवस्था हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में फैसला देते हुए यह बात कही है।


जब झारखंड में 50 फीसदी का बैरियर टूट गया है तो भारत सरकार को भी 50 प्रतिशत आरक्षण का बैरियर तोड़ देना चाहिए और देशभर में ओबीसी हो या और कटेगरी का रिजर्वेशन है उसे अगर बढ़ाने की जरूरत है तो बढ़ाना चाहिए। झारखंड में विभिन्न कटेगरी में 77 फीसदी आरक्षण देने पर उपेंद्र कुशवाहा ने इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि जेडीयू केंद्र सरकार पर आरक्षण बढ़ाने के लिए दबाव बनाएगी।


बता दें कि झारखंड में हेमंत सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए आरक्षण की सीमा 77 फ़ीसदी तक कर दी है। हेमंत सरकार के इस फैसले की हर तरफ चर्चा हो रही है, हालांकि इस पर संवैधानिक जानकार अलग-अलग राय रख रहे हैं। इसके बावजूद झारखंड में लागू की गई इस नई व्यवस्था के बाद बिहार में भी आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग उठने लगी है।