ब्रेकिंग न्यूज़

मधुबनी में मुखिया के घर पर 3 दर्जन बदमाशों ने किया हमला, ग्रामीणों ने 6 को दबोचा, मोबाइल और बाइक बरामद Sushant Singh Rajput के साथ यह फिल्म बनाना चाहते थे अनुराग कश्यप, कहा "अब होता है पछतावा.." Sarkari Naukri: बिहार के युवाओं के पास सरकारी नौकरी पाने का बढ़िया मौका, 218 पदों पर इस दिन से आवेदन प्रक्रिया शुरू; सैलरी 1,31,000 तक ट्रोलर्स के टारगेट पर होते हैं ज्यादातर मुस्लिम क्रिकेटर्स? Mohammed Shami ने किया खुलासा.. पूर्णिया में ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत, गुस्साए परिजनों ने किया जमकर हंगामा, कार्रवाई की मांग ISM पटना में खेल सप्ताह का शुभारंभ, 'Pinnacle' में 25 टीमें ले रही हैं भाग कटिहार के बरारी में NDA का शक्ति प्रदर्शन, विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ता सम्मेलन में जुटे सभी घटक दलों के दिग्गज PURNEA: बेलगाम ट्रक ने 12 साल के छात्र को कुचला, मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने किया सड़क जाम हंगामा BIHAR CRIME : रेल लाइन के पास मिला अज्ञात युवक का शव, हत्या या हादसा? जांच में जुटी पुलिस Samrat chaudhary: विकास को लेकर एक्टिव है NDA सरकार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने किए बड़े ऐलान

नगर निकाय चुनाव में आरक्षण पर सरकारी ड्रामे में जनता का पैसा फूंका गया: नीतीश सरकार ने वकीलों पर करोड़ों रूपये खर्च किये

1st Bihar Published by: Updated Thu, 20 Oct 2022 06:14:38 PM IST

नगर निकाय चुनाव में आरक्षण पर सरकारी ड्रामे में जनता का पैसा फूंका गया: नीतीश सरकार ने वकीलों पर करोड़ों रूपये खर्च किये

- फ़ोटो

PATNA: बिहार में नगर निकाय के चुनाव में आरक्षण को लेकर महीनों ड्रामा करने वाली नीतीश सरकार ने सरकारी खजाने से पानी की तरह पैसे बहाये। सरकार ने आखिरकार वही बात मानी जो कोर्ट शुरू से ही कह रहा था। लेकिन इस बीच बिहार सरकार ने सिर्फ वकीलों पर आम लोगों के करोड़ों रूपये खर्च कर दिये। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं मानने के लिए 15 रिव्यू पेटीशन दायर किया, जिसमें दिल्ली के वकीलों को मोटी फीस देकर बुलाया गया। सरकारी खजाने से वकीलों को मोटी फीस दे दी गयी और फिर सरकार ने यू-टर्न मार कर कोर्ट की बात मानने का शपथ पत्र दाखिल कर दिया। 


बता दें कि नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण को लेकर नीतीश सरकार शुरु से ही अपनी जिद पर अड़ी रही. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि आरक्षण तभी दिया जा सकता है जब राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट कराने के उसके आदेश को मानेगी. लेकिन बिहार सरकार अपनी शर्तों पर चुनाव कराने पर अड़ी रही. बिहार सरकार ने इसके लिए पटना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ा. लेकिन बुधवार को यू-टर्न मारते हुए ये कहा कि वह कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही चुनाव करायेगी।


बीजेपी ने कहा-वकील घोटाला हुआ

बीजेपी ने गुरुवार को इस मसले पर नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार कई घोटालों में लिप्त रही है, लेकिन पहली बार बिहार में वकील घोटाला हुआ है. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा- हमने कई बार नीतीश जी को आयोग बनाने के लिए कहा लेकिन वे नहीं माने. उन्होंने कोर्ट में कुल 15 रिव्यू पेटीशन दायर किए।


एक डेट पर 35 लाख लेने वाले वकील को बुलाया

संजय जायसवाल ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी जिद पूरी करने के लिए हर डेट पर 35 लाख रुपये लेने वाले वकीलों को दिल्ली से बुलवाया. नीतीश कुमार पर सवाल खड़ा करते हुए संजय जायसवाल ने पूछा कि जब सरकार को अपना पेटीशन वापस ही लेना था और कोर्ट में कोई बहस ही नहीं करनी थी तो इतनी बड़ी रकम वकीलों को क्यों दिए गये? अगर सरकार को कोर्ट की बात माननी ही थी तो उसके लिए बिहार सरकार के एजी यानि एडवोकेट जेनरल हैं ही. लेकिन क्या बिहार के एजी भी ‘रबर स्टैंप सीएम’ की तरह ‘रबर स्टैम्प एजी’ हो गए हैं. क्या एजी का काम कोर्ट में खुद बहस करने के बजाए दिल्ली से वकीलों को लाना भर रह गया है?