शराबबंदी से जेलों पर बढ़ा लोड तो नीतीश सरकार ने लिया ये फैसला, जानिए क्या है अलग

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 08, 2023, 9:21:17 AM

शराबबंदी से जेलों पर बढ़ा लोड तो नीतीश सरकार ने लिया ये फैसला, जानिए क्या है अलग

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PATNA : बिहार में वर्ष 2016 के अप्रैल महीने से शराबबंदी कानून लागू है। हालांकि इसमें बीच-बीच में कई तरह के संशोधन तो किए गए हैं लेकिन इसके बावजूद अभी भी राज्य में शराब पीना या इससे जुड़ा कारोबार करना अवैध और गलत माना गया है। इसको लेकर कठोर सजा का प्रावधान भी है। जिसके कारण बिहार के जेल में कैदियों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में अब राज्य सरकार ने सुबह में 13 नई जेल बनाने का निर्णय किया है।


राज्य सरकार ने एक मंडल स्तरीय जेल मधेपुरा तथा 12 अनुमंडल स्तरीय जेल कहलगांव, निर्मली, नरकटियागंज, राजगीर, मडोरा, रजौली, सिवान,गोपालगंज, चकिया, पकड़ीदयाल,महनार और सिमरी बख्तियारपुर में बनाने का निर्णय लिया है। इन जिलों की क्षमता एक हजार कैदियों की होगी। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगी है। 


बताया जा रहा, राज्य सरकार के स्तर से सहमति मिलने के बाद इन सभी जेलों के निर्माण से संबंधित कवायद जेल निदेशालय ने शुरू कर दी है। इसके अलावा मंडल कारा भभुआ, जमुई, औरंगाबाद, अरवल और उप-कारा पालीगंज में मौजूद जेलों में अतिरिक्त नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें दो-तीन स्थानों पर नए भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है और जल्द ही इन्हें शुरू भी कर दिया जाएगा। 15 काराओं में 33 अतिरिक्त बंदी कक्ष के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई है।इसके अलावा पांच जेलों में नए कारा भवन और 15 काराओं में 33 नए बंदी कक्ष का निर्माण होने से 9 हजार 819 अतिरिक्त कैदियों के रखने की क्षमता बढ़ जाएगी। इन सभी का निर्माण होने के बाद आने वाले समय में सूबे में करीब 23 हजार कैदियों को रखने की क्षमता बढ़ जाएगी।


इधर, राज्य की जेलों में अभिलेखागारों को डिजिटल बनाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। फुलवारीशरीफ जिला कारा में हाल में डिजिटल अभिलेखागार तैयार किया गया है। इससे सभी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित रूप से संजोए कर रखा जा सकेगा। समय आने पर इन्हें खोजने में भी आसानी होगी।