Bihar Politics: NDA में महाभारत! JDU ने चिराग को दिया करारा जवाब, "अभिमन्यु बनना आसान है...पर सीखने के लिए अर्जुन बनना पड़ता है, वरना.."

Bihar Politics: बिहार में NDA के भीतर चिराग पासवान और JDU के बीच तनाव। अरुण भारती के महाभारत वाले बयान पर JDU का जवाब ‘अभिमन्यु बनना आसान, अर्जुन बनना पड़ता है।’

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 15, 2025, 9:00:08 AM

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प्रतीकात्मक - फ़ोटो Google

Bihar Politics: बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले NDA गठबंधन में तनाव बढ़ता अब साफ़ दिख रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद और चिराग पासवान के जीजा अरुण भारती ने एक पोस्ट में महाभारत के पात्रों भीष्म, धृतराष्ट्र, गांधारी और शकुनि का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए निशाना साधा था। उन्होंने लिखा कि जब ये पात्र मौन रहे, तब अभिमन्यु ने अनुभव की कमी के बावजूद चक्रव्यूह में छलांग लगाई, क्योंकि समय का मान रखने के लिए नव-संकल्प चाहिए। इस बयान को नीतीश कुमार और JDU नेतृत्व पर तंज माना गया था, जिससे गठबंधन में खटास बढ़ी।


इसके जवाब में JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने 15 जुलाई को तीखा पलटवार किया है। उन्होंने लिखा है “अभिमन्यु बनना आसान है, अर्जुन बनना पड़ता है सीखने के लिए। भूलना नहीं चाहिए.. अभिमन्यु सिर्फ प्रवेश करता है, वीरगति भी पाता है। इतिहास में नाम जिद से नहीं, कार्य से लिखा जाता है। जो हर बार द्वार तक पहुंचते हैं, वे योद्धा नहीं, द्वारपाल बन जाते हैं।” नीरज का यह बयान चिराग और अरुण को अपरिपक्व और अतिउत्साही बताने की कोशिश है, जो गठबंधन धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं।


यह विवाद चिराग पासवान की हालिया टिप्पणियों से शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने बिहार में कानून-व्यवस्था जैसे नालंदा में हिमांशु पासवान और अनु कुमार की हत्या और पूर्णिया में डायन प्रथा के मामले को लेकर नीतीश सरकार पर सवाल उठाए थे। JDU ने इसे दबाव की रणनीति माना है क्योंकि चिराग की LJP (रामविलास) 2025 चुनाव में 25-28 सीटों की मांग कर रही है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी चिराग को ‘अभिमन्यु’ से जोड़ा, कहते हुए कि युवा नेता कभी-कभी जटिलताओं को समझ नहीं पाते हैं।


JDU ने सधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लोकतंत्र में सभी को बोलने का हक है, लेकिन चिराग को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। उधर RJD ने इस तनाव को भुनाने की कोशिश की है यह दावा करते हुए कि NDA में दलित वोटों को लेकर चिराग और मांझी के बीच तकरार है। 2020 में चिराग ने JDU के खिलाफ 137 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिससे नीतीश की पार्टी को नुकसान हुआ था। अब JDU को आशंका है कि चिराग फिर से ऐसी ही रणनीति अपना सकते हैं।