Bjp Mla Mishrilal Yadav: BJP विधायक मिश्रीलाल यादव को तीन महीने की सजा, MP-MLA कोर्ट ने भेजा जेल

Bjp Mla Mishrilal Yadav: दरभंगा की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आखिरकार बीजेपी विधायक को मारपीट के मामले में तीन महीने के लिए जेल भेज दिया. कोर्ट ने सजा के बिंदु पर सुनवाई से 24 घंटा पहले ही मिश्रीलाल को कस्टडी में ले लिया था.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Fri, 23 May 2025 04:54:08 PM IST

Bjp Mla Mishrilal Yadav

जेल में कटेंगे तीन महीने - फ़ोटो reporter

Bjp Mla Mishrilal Yadav: बीजेपी विधायक मिश्रीलाल यादव को आखिरकार कोर्ट ने जेल भेज दिया। मारपीट के एक मामले में कोर्ट ने मिश्रीलाल को तीन महीने की सजा सुनाई थी। सजा के बिंदु पर सुनवाई से पहले ही 22 मई को कोर्ट ने विधायक को कस्टडी में ले लिया था। कोर्ट ने तीन महीने की सजा को बरकरार रखा और बीजेपी विधायक मिश्रीलाल को तीन महीने के लिए जेल भेज दिया।


दरअसल, पूरा मामला साल 2019 का है। समैला के रहने वाले उमेश मिश्र ने 30 जनवरी 2019 को मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने 17 अप्रैल 2020 को मामले पर संज्ञान लिया था। कोर्ट ने विधायक मिश्री लाल को दोषी करार देते हुए तीन महीने की जेल और 500 रुपए जुर्माना की सजा सुनाई थी।


सजा को माफ कराने के लिए विधायक ने कोर्ट में अर्जी लगाई थी। गुरुवार को वह अपनी पैरवी लेकर कोर्ट पहुंचे थे लेकिन इससे पहले ही स्पेशल जज करुणानिधि प्रसाद आर्य की बेंच ने उन्हें कस्टडी में लेने का आदेश जारी कर दिया और बाद में उन्हें 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।


इस मामले में शुक्रवार 23 मई को सजा की बिंदु पर सुनवाई के बाद फैसला आने वाला था। इसी मामले की तारीख पर अपील करने आये थे। स्पेशल कोर्ट ने कहा है कि 23 मई को सजा के बिंदू पर सुनवाई के दौरान मिश्री लाल यादव का कोर्ट में मौजूद रहना जरूरी है। इसके बाद अदालत ने विधायक को 24 घंटे की कस्टडी में मंडल कारा, दरभंगा भेज दिया था।


एडीजे 3 सुमन कुमार दिवाकर की कोर्ट ने आज मिश्रीलाल यादव की अर्जी पर सुनवाई करते हुए उन्हें राहत देनें से इनकार कर दिया और मिश्रीलाल की तीन महीने की सजा को बरकरार रखते हुए जेल भेज दिया। सुनवाई के दौरान बीजेपी विधायक मिश्रीलाल यादव भी कोर्ट में मौजूद रहे। मिश्रीलाल यादव ने कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।