Bhagalpur Shiv Corridor : बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ, इस जगह जल्द शुरू होगा काम

सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने की राह साफ हो गई है। रेलवे जमीन के बदले सरकार ने अन्य जगह की भूमि देने का निर्णय लिया है, जिससे कॉरिडोर निर्माण संभव होगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 22 Jan 2026 09:43:37 AM IST

Bhagalpur Shiv Corridor : बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ, इस जगह जल्द शुरू होगा काम

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Bhagalpur Shiv Corridor : भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में भगवान शिव की श्रद्धा का नया अध्याय लिखने के लिए ‘शिव कॉरिडोर’ का निर्माण संभव होने की राह अब पूरी तरह से तैयार हो गई है। लंबे समय से गंगा के किनारे रेलवे की जमीन पर कॉरिडोर निर्माण की योजना अटकी हुई थी, लेकिन अब भूमि एक्सचेंज नीति के तहत जिला प्रशासन ने रेलवे को नई जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सुल्तानगंज में उज्जैन और वाराणसी की तरह शिव कॉरिडोर का निर्माण संभव हो जाएगा।


रेलवे जमीन के बदले मिलेगी दूसरी जगह की भूमि

जानकारी के अनुसार, सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ मंदिर के पास कॉरिडोर और धर्मशाला जैसी सुविधाओं के लिए चिह्नित जमीन रेलवे की है। इस कारण प्रशासन को कॉरिडोर निर्माण के लिए रेलवे से जमीन लेने में कठिनाई आ रही थी। इसी समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने रेलवे को 17 एकड़ 47.625 डिसमिल जमीन के बदले तीन जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है।इन तीन जगहों में शामिल हैं:जगदीशपुर हॉल्ट के पास बिहार सरकार की 18.98 एकड़ जमीन,बरारी के समीप 0.6 डिसमिल जमीन और सुल्तानगंज में एनएच के आईबी के पास 0.7 एकड़ जमीन इस भूमि एक्सचेंज से रेलवे को अपनी जमीन छोड़ने की अनुमति मिल सकेगी और कॉरिडोर निर्माण के लिए जरूरी भूमि मुहैया हो सकेगी।


समाहर्ता ने भेजा विभाग को पत्र, अब मंजूरी का इंतजार

जिला प्रशासन ने भूमि के बदले जमीन देने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए समाहर्ता ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को नि:शुल्क भू-स्थानांतरण के लिए पत्र भेजा है। विभाग की मंजूरी मिलते ही लैंड एक्सचेंज (बदलेन) का काम शुरू हो जाएगा।इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तरह ‘शिव कॉरिडोर’ का निर्माण संभव हो जाएगा।


गंगा की धारा मोड़ने का काम जारी, श्रावणी मेला में मिलेगा नया स्नान स्थल

सुल्तानगंज में गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर जल संसाधन विभाग काम कर रहा है। इसके लिए अरबों की लागत से परियोजना चल रही है। इस योजना के पूरा होने के बाद गंगा की धारा को पुराने रास्ते की ओर मोड़ा जाएगा और नदी का बहाव पुनः पुरानी सीढ़ी घाट की तरफ ले जाया जाएगा।


इसका सीधा फायदा श्रावणी मेला में मिलेगा। इस साल श्रावणी मेला पर कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान का मौका पुरानी सीढ़ी घाट के पास ही मिल सकेगा। यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात है क्योंकि वर्तमान में स्नान के लिए सही और सुरक्षित जगह का इंतजार रहता है।


रेलवे ने भी मांग की थी भूमि का आदान-प्रदान

पूर्व रेलवे मालदा के डीआरएम मनीष कुमार ने भी भूमि एक्सचेंज की मांग जिला प्रशासन से की थी। उन्होंने कहा था कि रेलवे के लिए यह जमीन महत्वपूर्ण है और कॉरिडोर निर्माण के लिए रेलवे को दूसरी जगह की जमीन दी जाए। प्रशासन ने डीआरएम के प्रस्ताव से सहमति जताई और अंततः बिहार सरकार की जमीन देने का निर्णय लिया गया। साथ ही, एडीएम दिनेश राम ने बताया कि रेलवे को जमीन देने की अनुमति के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है। विभाग की अनुमति मिलते ही भूमि के बदले जमीन देने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और कॉरिडोर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ेंगे।


शिव कॉरिडोर: सुल्तानगंज की पहचान बदलने वाली परियोजना

सुल्तानगंज में शिव कॉरिडोर का निर्माण सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र की पहचान को भी बदल देगा। उज्जैन और वाराणसी जैसे प्रमुख शिव तीर्थस्थलों की तरह सुल्तानगंज में भी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं बनेंगी।कॉरिडोर के बनने से यहां आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा, व्यवस्था और सुरक्षा में सुधार होगा। साथ ही, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


अब सिर्फ विभागीय मंजूरी और भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है, उसके बाद सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने की दिशा में काम शुरू हो जाएगा। यह परियोजना सुल्तानगंज को धार्मिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाली साबित होगी।