1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 22 Jan 2026 08:52:20 AM IST
- फ़ोटो
BPSC teacher recruitment : बिहार के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला पिछले एक साल से फंसा हुआ है। इसका मुख्य कारण आरक्षण रोस्टर का क्लियर न होना है। इस समय तांती-ततवा जाति का आरक्षण विवाद सबसे बड़ा बाधक बन गया है। पहले राज्य सरकार ने इस जाति को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिया था। कई उम्मीदवारों को इसी आरक्षण के तहत नियुक्ति में लाभ भी मिला। लेकिन न्यायालय ने तांती-ततवा को SC श्रेणी में रखने के फैसले को बदलते हुए इसे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद रोस्टर में संशोधन होना आवश्यक है, क्योंकि रोस्टर क्लियर होने के बाद ही नई भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में पदों की संख्या और रिक्तियों का आंकड़ा चिंताजनक है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में विभिन्न ट्रेड में कुल 3375 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 1681 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं। यानी 1694 पद खाली हैं। इनमें 828 सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति अभी बाकी है। वहीं पॉलिटेक्निक संस्थानों में 46 कॉलेजों के विभिन्न ट्रेड में 2302 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 1096 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। यहां 1150 व्याख्याता पदों पर नियुक्ति करनी है। कुल मिलाकर दोनों संस्थानों में 2000 से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस मामले को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग से तांती-ततवा जाति के आरक्षण मामले का समाधान कराने का आग्रह किया था। विभाग का मानना है कि न्यायालय के आदेश के बाद ही इस वर्ग का आरक्षण स्पष्ट होगा और उसी के आधार पर रोस्टर क्लियर किया जा सकेगा। रोस्टर क्लियर होने के बाद नई रिक्तियों को BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) को भेजा जाएगा और आयोग भर्ती प्रक्रिया पूरी करेगा।
हालांकि इस पूरे विवाद के कारण शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई है, लेकिन अब न्यायालय के आदेश के बाद प्रक्रिया फिर से शुरू होने की संभावना है। जैसे ही सामान्य प्रशासन विभाग आरक्षण मामले को स्पष्ट करेगा, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग नई वेकेंसी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजेगा और उसके बाद BPSC को भेजकर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक की कमी के कारण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने में समस्या आ रही है। कई कॉलेजों में शिक्षकों की अनुपस्थिति से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है और प्रयोगशाला, शोध कार्य तथा छात्रों के मार्गदर्शन में बाधा उत्पन्न हो रही है। यदि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाए तो यह स्थिति सुधर सकती है। राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की रिक्तता दूर हो और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।