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Tejashwi Yadav: नीतीश कुमार के खास 𝐌𝐋𝐂 का “वोट घोटाला” उजागर, तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप

चुनावी साल में बिहार की सियासत गरमाई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के MLC दिनेश सिंह पर दो अलग-अलग वोटर ID रखने और फर्जीवाड़ा करने का बड़ा आरोप लगाया है। इस मामले ने चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच विवाद बढ़ा दिया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Aug 14, 2025, 7:43:50 AM

Tejashwi Yadav

तेजस्वी यादव - फ़ोटो GOOGLE

Tejashwi Yadav:  बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच चुकी हैं। इसी बीच, राजद के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए के खास MLC और JD(U) के विधानपरिषद सदस्य श्री दिनेश सिंह पर बड़ा आरोप लगाया है। 


दरअसल, तेजस्वी यादव ने सुबह-सुबह अपने  X ( पूर्व में ट्विटर ) पर एक पोस्ट जारी कर बड़ा खुलासा किया हैं। उन्होंने  पोस्ट में लिखा है कि  दिनेश सिंह के पास दो अलग-अलग EPIC IDs (REM0933267 और UT01134527) हैं, जो दो अलग-अलग जिलों के लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में दो- दो मतदाता पहचान पत्र के रूप में दर्ज हैं। इसके अलावा, उन्होंने SIR (Special Summary Revision) प्रक्रिया में भी दो अलग-अलग गणना फॉर्म भरे और दोनों फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा सत्यापित किए गए हैं। यह सवाल उठता है कि कैसे चुनाव आयोग की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिनेश सिंह के नाम पर दो अलग-अलग वोट बने, जबकि वे वैशाली की सांसद वीणा देवी के पति हैं, जिनके भी दो EPIC IDs और दो वोटर कार्ड हैं।


तेजस्वी यादव ने इसे चुनाव आयोग और एनडीए गठबंधन के बीच मिलीभगत करार दिया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा जानबूझकर ऐसी गड़बड़ियां की गई हैं ताकि NDA को चुनावी लाभ मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या चुनाव आयोग अपनी इन गड़बड़ियों को स्वीकार करेगा और क्या दिनेश सिंह को दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से नोटिस जारी किया जाएगा। इस खुलासे ने बिहार की सियासी पार्टियों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है और आगामी चुनावों के लिए बहस का मुद्दा बन गया है। राजनीतिक विशेषज्ञ भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अगर चुनाव आयोग इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है, तो यह बिहार के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, खासकर ऐसे समय जब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए।