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Bihar News: बिस्कोमान चुनाव की वोटिंग खत्म, हाई कोर्ट के रोक के बाद काउंटिंग पर संशय

Bihar News: बिहार राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (बिस्कोमान) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए हुए मतदान के बाद अब मतगणना पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 09, 2025, 3:02:00 PM

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बिहार न्यूज - फ़ोटो GOOGLE

Bihar News: बिहार राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (बिस्कोमान) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए हुए मतदान के बाद अब मतगणना पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां एक ओर मतदान प्रक्रिया शुक्रवार दोपहर को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई, वहीं दूसरी ओर झारखंड हाई कोर्ट के एक आदेश ने मतगणना पर रोक की संभावना पैदा कर दी है।


पटना के जिला अधिकारी (डीएम) चंद्रशेखर सिंह मतगणना की अनुमति देने या ना देने को लेकर गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं। अब इस बात पर सबकी निगाहें हैं कि जिला प्रशासन मतगणना कराएगा या हाई कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र इसे रोकेगा। आरजेडी के एमएलसी डॉ. सुनील सिंह के वकील का दावा है कि झारखंड हाई कोर्ट ने बिस्कोमान चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है। उनका आरोप है कि बीजेपी नेता विशाल सिंह गुट जिला प्रशासन पर मतगणना कराने का दबाव बना रहा है।


बिस्कोमान अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला आरजेडी समर्थित वंदना सिंह और बीजेपी समर्थक विशाल सिंह के बीच है। वंदना सिंह, आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह की पत्नी हैं, जिनके समर्थन में पार्टी का मजबूत गुट सक्रिय है। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए विनय कुमार (सुनील सिंह गुट) और महेश राय (विशाल सिंह गुट) के बीच सीधी टक्कर है। दोनों ही गुटों ने चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगाया और कई रणनीतिक दांव-पेंच खेले गए।


पटना स्थित कलेक्ट्रेट भवन में बिस्कोमान चुनाव की वोटिंग शांतिपूर्ण वातावरण में पूरी की गई। कुल 20 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी समर्थक विशाल सिंह के पक्ष में ज्यादा सदस्य हैं, जिससे उनके जीतने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। हालांकि मतगणना पर कोर्ट के आदेश के कारण स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।


बिस्कोमान जैसे बड़े सहकारी संस्थान के चुनाव पर न्यायिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक अनिश्चितता ने इस चुनाव को बेहद संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक दलों के गुटीय संघर्ष और कानूनी पेचदगियों के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सबकी निगाहें डीएम चंद्रशेखर सिंह के फैसले पर टिकी हैं। यदि मतगणना की अनुमति दी जाती है तो बिस्कोमान की नई कार्यकारिणी का गठन शीघ्र हो सकेगा। अन्यथा मामला कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ सकता है।