मिलता तबे न लोगवा हिलऽता: शराबबंदी पर सख्ती या समाप्ति की मांग, BJP विधायक बोले..शराब ना मिली तो ना हिली

बेतिया में लौरिया से बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून या तो पूरी सख्ती से लागू हो या समाप्त किया जाए। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब बिक्री जारी है और सरकार को अपने फैसले पर..

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 21 Feb 2026 10:23:21 PM IST

बिहार न्यूज

बंदी का मतलब बंदी होना चाहिए - फ़ोटो रिपोर्टर

BETTIAH: बिहार में 10 साल से नाम का पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। हर कोई जानता है कि शराब घर पर भी आसानी से मंगवाई जा रही है। विपक्ष के साथ-साथ अब सत्ता पक्ष के लोग भी बिहार में लागू इस शराबबंदी को लेकर सरकार से सवाल कर रहे हैं और इसकी समीक्षा की मांग कर रहे हैं। लौरिया से बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने भी कह दिया है कि जब शराब मिलता तबे ना लोगवा हिलता, शराब ना मिली तो लोगवा ना हिली।


 जब मिलता बिकाता लोग जेलो जाता ओकरा बादो यदि सुधार नईखे तो सरकार को आपन फैसले पर विचार करे के चाही। लौरिया के भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बेतिया में शराबबंदी नीति को लेकर अपने ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार या तो शराबबंदी कानून को पूरी सख्ती के साथ लागू करे अथवा इसे पूरी तरह समाप्त कर दें। 


विधायक ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से शराब की बिक्री निरंतर जारी है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है और नशे की अन्य प्रवृत्तियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, “जब मैं किसी बारात में जाता हूं तो आधे से अधिक लोग शराब का सेवन किए हुए मिलते हैं।”भोजपुरी में हालिया शराबबंदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मिलता तबे न ई लोगवा हिलऽता।”


उन्होंने सरकार के हालिया निर्णय का समर्थन करते हुए अश्लील गानों पर स्पष्ट और कठोर सेंसर व्यवस्था लागू करने की बात कही। उनका कहना था कि इससे सामाजिक मर्यादा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हो सकेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि अश्लील गानों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो समाज में आंतरिक विभाजन की स्थिति और गहरी हो सकती है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। 


उन्होंने कहा कि या तो सही तरीके से बंद कर दिया जाए नहीं तो जैसे पहले था वैसे कर दिया जाए। बंदी का मतलब बंदी होना चाहिए। किसी भी बारात में जाते हैं तो आधे से ज्यादा लोगों को पीते हुए देखते हैं। जब शराब मिलता है तब ना लोग पीते हैं। ना मिली तो ना हिली.. जब मिलता बिकाता लोग जेलो जा ता ओकरा बादो यदी सुधार नहीं खे तो सरकार को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए। 


बता दें कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद, जो सत्तारूढ़ राजग का हिस्सा हैं, इन दोनों ने भी शराब नीति की समीक्षा की मांग करते हुए कहा था कि इससे राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। जीतनराम मांझी ने यहां तक कह दिया कि शराब पर प्रतिबंध के बावजूद पड़ोसी राज्यों से महंगी शराब की होम डिलीवरी धड़ल्ले से हो रही है। जनता का पैसा बाहर जा रहा है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया था कि जहां अमीर लोग बिना किसी परेशानी के महंगी शराब खरीद सकते हैं, वहीं गरीब जहरीली शराब पीने को मजबूर हो जाते हैं। इसका असर खासकर दलित समुदाय, विशेष रूप से भुइयां मुसहरों पर पड़ रहा है। शराबबंदी कानून के दस साल बाद फिर से इसकी समीक्षा की मांग अब उठने लगी है। बीजेपी के विधायक भी अब समीक्षा की मांग कर रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा आगे क्या कदम उठाते हैं?