NDA राज में यही सुशासन है ? करोड़ों इन्वेस्ट कर बर्बादी के कगार पर पहुंचे नए उद्यमी, भंडार निगम और FCI के बीच पीस रहे निवेशक, टेंडर ही फाइनल नहीं किया जा रहा...अब FCI ने निगम MD को लिखा कड़ा पत्र

बिहार में पीईजी योजना के तहत करोड़ों का निवेश कर वेयरहाउस बनाने वाले उद्यमी भंडारण शुरू नहीं होने से संकट में हैं। भारतीय खाद्य निगम ने बिहार राज्य भंडार निगम को टेंडर फाइनल नहीं करने पर कड़ा पत्र लिखा है। 25 फरवरी को अहम बैठक में समाधान की उम्मीद

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Sat, 21 Feb 2026 12:55:25 PM IST

Bihar News, बिहार राज्य भंडार निगम, भारतीय खाद्य निगम, FCI Letter, PEG योजना, वेयरहाउस टेंडर विवाद, बिहार उद्यमी संकट, गोदाम भंडारण समस्या, नौकरशाही अड़ंगा, Bihar Warehouse News

- फ़ोटो Google

Bihar News:  बिहार में नए उद्यम लगाने में सबसे बड़ा दुश्मन नौकरशाही है. आप कोई नया उद्यम लगाएंगे तो यही नौकरशाही पग-पग पर अडंगा लगायेगी. बिहार के नए उद्यमी अफसरों की अडंगेबाजी से खासे परेशान हैं. बैंक से कर्ज लेकर करोड़ों रू लगा दिया, लेकिन बिहार के सरकारी सिस्टम ने उन्हें सड़क पर ला दिया है. भंडार निगम के अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये से नए उद्यमी परेशान हैं. टेंडर जारी नहीं होने पर भारतीय खाद्य निगम ने भंडार निगम के एमडी को कड़ा पत्र लिखा है. इधर भंडार निगम के एमडी ने कहा है कि 25 फरवरी को इस पर अंतिम निर्णय लिए जाने की प्रबल संभावना है.

करोड़ों का निवेश कर नए उद्यमी परेशान 

 बिहार कई नए उद्यमियों ने बड़े-बड़े वेयरहाउस का निर्माण कराया. घर और बैंक से करोड़ों रुपया कर्ज लेकर पी.ई.जी. योजना के तहत नए वेयरहाउस का निर्माण कराया. निर्माण के 8 महीने बीत गए, इसके बाद भी आज तक गोदाम खाली है. भंडारण का कार्य शुरू नहीं हुआ है . इसके पीछे बिहार भंडार निगम की लापरवाही सामने आ रही है. भंडार निगम भंडारण को लेकर टेंडर का कार्य पूर्ण नहीं कर पा रहा. जिस वजह से नए उद्यमियों द्वारा निर्मित किए गए 1000 और 2000 एमटी क्षमता के वेयरहाउस में आज तक भंडारण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है. इसको लेकर वेयर हाउस निर्माण करने वाले नए उद्यमियों ने भंडार निगम के अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन इनका टाल मटोल वाला रवैया लगातार जारी है . 

धन लगाकर संकट में फंसे हैं.... 

वेयर हाउस निर्माण करने वाले नए उद्यमियों का कहना है कि उन लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर निर्माण कराया, लेकिन गोदाम खाली है. इस संबंध में भंडार निगम के प्रबंध निदेशक से लेकर अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है .निगम की निष्क्रियता से उद्यमियों की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है. यह योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना है. लेकिन निगम की उदासीनता से नए उद्यमी संकट में फंस गए हैं. 

एफसीआई ने पत्र लिखकर पूछा- टेंडर क्यों नहीं फाइनल कर रहे ? 

संबंधित अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये से सिर्फ वेयर हाउस निर्माण करने वाले नए उद्यमी ही परेशान नहीं हैं, बल्कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) भी परेशान है. एफसीआई ने बिहार राज्य भंडार निगम के प्रबंध निदेशक को कड़ा पत्र लिखा है.  17 फरवरी को लिखे पत्र में एफसीआई ने कहा है कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा समय-समय पर आपको (भंडार निगम) को नए केंद्रों के लिए यथाशीघ्र निविदा निष्पादन करने को कहा गया. लेकिन भंडार निगम के द्वारा अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है. बार-बार निविदा जारी कर निविदा खुलने की तिथि को विस्तारित कर, निविदा को ही रद्द किया जा रहा है. जबकि आपको (भंडार निगम एमडी) भली भांति स्पष्ट हैं कि उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाएं नए केंद्रों पर लागू नहीं होती है.

भंडार निगम आपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहा-एफसीआई

एफसीआई ने बार-बार पत्र लिखकर निविदा संपन्न कराने को लेकर आग्रह किया. नए केंद्रों पर अविलंब संशोधित निविदा के माध्यम से संवेदक नियुक्त करने को कहा गया. लेकिन आपने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया. पी.ई.जी. की नोडल एजेंसी होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि समय से गोदाम सुचारू रूप से चलाने का इंतजाम करें. निवेशक की स्थिति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. निवेशक की तकलीफ के लिए भी आप स्वयं जिम्मेदार हैं. आपके कार्यालय से जारी आदेश मुख्यालय के सभी निर्देशों एवं वित्तीय प्रक्रिया का उल्लंघन है और एक तरफा निर्णय है. आपका निर्णय इस कार्यालय को स्वीकार्य नहीं है. अगर किसी भी केंद्र पर पुराने ठेकेदारों से कार्य करवाया जाता है तो भारतीय खाद्य निगम आपके द्वारा जारी मनमाने आदेश पर पुराने दर पर भुगतान करने को बाध्य नहीं होगा. साथ ही संबंधित संवेदकों को किए गए भुगतान की संपूर्ण जिम्मेदारी आपकी होगी. ऐसे में आपसे फिर से अनुरोध है कि यथाशीघ्र संशोधित निविदा के माध्यम से संवेदक नियुक्त करें.

क्या कहते हैं भंडार निगम के एमडी

इस संबंध में हमने बिहार राज्य भंडार निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन से संपर्क साधा। हमने पूछा कि नए वेयर हाउस का जो निर्माण हुआ है, उसमें भंडारण की क्या स्थिति है ? ठेकेदार के चयन को लेकर निविदा क्यों नहीं निकाला जा रहा ? क्या एफएसीआई ने आपके इस गैर जिम्मेदाराना कार्य पर आपत्ति जताते हुए पत्र लिखा है ? इस पर उन्होंने कहा कि तीन जगहों पर नए निवेशकों ने वेयर हाउस बनाए हैं. गोपालगंज में क्षमता से आधा भंडारण हुआ है, बाकी गोदामों में भंडारण नहीं हो रहा है. इसके लिए एफसीआई भी जिम्मेदार है. कोर्ट में भी मामला गया हुआ है. वैसे...इन सारे मुद्दों पर समाधान को लेकर कोलकाता में एफसीआई और बिहार राज्य भंडार निगम के अधिकारियों के बीच बैठक प्रस्तावित है. मेरे दो अधिकारी मीटिंग में जा रहे हैं. 25 तारीख को इन मुद्दों पर सार्थक बातचीत होगी. पूरी संभावना है कि उस दिन यह मसला सुलझा लिया जायेगा.  भंडार निगम ने एफसीआई की डिमांड को स्वीकर कर लिया है. ऐसे में आशा है कि नए गोदामों में भंडारण को लेकर लेकर जो बातें आ रही हैं, उसका पूर्णरूपेण समाधान हो जाएगा.